जलवायु (CH-4) Notes in Hindi || Class 9 SST Geography Chapter 4 in Hindi ||

पाठ – 4

जलवायु

In this post we have given the detailed notes of class 9 SST (Geography) Chapter 4 जलवायु (Climate) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 9 exams.

इस पोस्ट में कक्षा 9 के सामाजिक विज्ञान (भूगोल) के पाठ 4 जलवायु (Climate) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 9 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।

BoardCBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board
TextbookNCERT
ClassClass 9
SubjectSST (Geography)
Chapter no.Chapter 4
Chapter Nameजलवायु (Climate)
CategoryClass 9 SST (Geography) Notes in Hindi
MediumHindi
Class 9 SST (Geography) Chapter 4 जलवायु (Climate) in Hindi

परिचय

  • पिछले दो अध्यायों में स्थलाकृतियों और अपवाह के बारे में पढ़ा।
  • इस अध्याय में देश की वायुमंडलीय स्थिति के बारे में।
  • दिसंबर में ऊनी वस्त्र क्यों पहनते हैं, मई का महीना गर्म और असुविधाजनक क्यों होता है, जून और जुलाई में वर्षा क्यों होती हैं।
  • इन सभी प्रश्नों के उत्तर भारत की जलवायु का अध्ययन करके जान सकते हैं।
  • एक विशाल क्षेत्र में लंबे समय (30 वर्ष से अधिक) में मौसम की स्थितियों और विविधताओं का योग ही जलवायु है।
  • मौसम एक विशेष समय में एक क्षेत्र की वायुमंडलीय स्थिति को बताता है।
  • मौसम और जलवायु के तत्व, जैसे – तापमान, वायुमंडलीय दाब, पवन, आर्द्रता और वर्षण एक ही होते हैं।
  • आपने अवश्य ध्यान दिया होगा कि मौसम की स्थिति प्रायः एक दिन में ही कई बार बदलती है।
  • लेकिन फिर भी कुछ सप्ताह, महीनों तक वायुमंडलीय स्थिति लगभग एक समान ही बनी रहती है, जैसे दिन गर्म या ठंडे, हवादार या शांत, आकाश बादलों से घिरा या साफ और आर्द्र या शुष्क हो सकते हैं।
  • महीनों के औसत वायुमंडलीय स्थिति के आधार पर वर्ष को ग्रीष्म/शीत या वर्षा ऋतुओं में विभाजित किया गया है।
  • विश्व को अनेक जलवायु प्रदेशों में बाँटा गया है।
  • क्या आप जानते हैं कि भारत की जलवायु कैसी है और ऐसा क्यों है? इस संबंध में, हम इस अध्याय में पढ़ेंगे।
  • मॉनसून शब्द की व्युत्पत्ति अरबी शब्द ‘मौसिम’ से हुई है, जिसका शाब्दिक अर्थ है- मौसम।
  • मॉनसून का अर्थ, एक वर्ष के दौरान वायु की दिशा में ऋतु के अनुसार परिवर्तन है।
  • भारत की जलवायु को मॉनसून जलवायु कहा जाता है।
  • एशिया में इस प्रकार की जलवायु मुख्यतः दक्षिण और दक्षिण-पूर्व में पाई जाती है।
  • सामान्य प्रतिरूप में लगभग एकरूपता होते हुए भी देश की जलवायु-स्थिति में स्पष्ट प्रादेशिक भिन्नताएँ हैं।
  • आई, हम दो महत्वपूर्ण तत्व तापमान और वर्षण को लेकर देखें कि एक स्थान से दूसरे स्थान पर और एक मौसम से दूसरे मौसम में इनमें किस प्रकार की भिन्नता है।
  • गर्मियों में, राजस्थान के मरुस्थल में कुछ स्थानों का तापमान लगभग 50° से. तक पहुँच जाता है, जबकि जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों में तापमान लगभग 20° से. रहता है।
  • सर्दी की रात में, जम्मू-कश्मीर में द्रास का तापमान -45° से. तक हो सकता है, जबकि थिरुवनंतपुरम में यह 22° से. हो सकता है।
  • कुछ क्षेत्रों में रात और दिन के तापमान में बहुत अधिक अंतर होता है। थार के मरुस्थल में दिन का तापमान 50° से. तक हो सकता है, जबकि उसी रात यह नीचे गिर कर 15° से. तक पहुँच सकता है।
  • दूसरी ओर, केरल या अंडमान और निकोबार में दिन और रात का तापमान लगभग समान ही रहता है।
  • अब वर्षण की ओर ध्यान दें। वर्षण के रूप और प्रकार में ही नहीं, बल्कि इसकी मात्रा और ऋतु के अनुसार वितरण में भी भिन्नता होती है।
  • हिमालय में वर्षण अधिकतर हिम के रूप में होता है जबकि देश के शेष भाग में यह वर्षा के रूप में होता है।
  • वार्षिक वर्षण में भिन्नता मेघालय में 400 सेमी से लेकर लद्दाख और पश्चिमी राजस्थान में यह 10 सेमी से भी कम होती है।
  • देश के अधिकतर भागों में जून से सितंबर तक वर्षा होती है, लेकिन कुछ क्षेत्रों जैसे तमिलनाडु तट पर अधिकतर वर्षा अक्टूबर और नवंबर में होती है।
  • सामान्य रूप से तटीय क्षेत्रों के तापमान में अंतर कम होता है।
  • देश के आंतरिक भागों में मौसमी या दैनिक अंतर अधिक होता है।
  • उत्तरी मैदान में वर्षा की मात्रा सामान्यतः पूर्व से पश्चिम की ओर घटती जाती है।
  • ये भिन्नताएँ लोगों के जीवन में विविधता लाती हैं, जो उनके भोजन, वस्त्र और घरों के प्रकार में दिखती है।
  • राजस्थान में घरों की दीवार मोटी और छत सपाट क्यों होती है?
  • तराई क्षेत्र और गोवा तथा मंगलौर में ढाल वाली छतें क्यों होती हैं?
  • असम में प्रायः कुछ घर बाँस के खंभों (Stilt) पर क्यों बने होते हैं?

जलवायु नियंत्रक

  • किसी भी क्षेत्र की जलवायु को नियंत्रित करने वाले छह प्रमुख कारक हैं – अक्षांश, तुंगता (ऊँचाई), वायु दाब और पवन तंत्र, समुद्र से दूरी, महासागरीय धाराएँ और उच्चावच लक्षण।
  • पृथ्वी की गोलाई के कारण, इसे प्राप्त सौर ऊर्जा की मात्रा अक्षांशों के अनुसार अलग-अलग होती है।
  • परिणामस्वरूप तापमान विषुवत वृत्त से ध्रुवों की ओर सामान्यतः घटता जाता है।
  • जब कोई व्यक्ति पृथ्वी की सतह से ऊँचाई की ओर जाता है, तो वायुमंडल की सघनता कम होती है और तापमान घट जाता है।
  • इसलिए पहाड़ियाँ गर्मी के मौसम में भी ठंडी होती हैं।
  • किसी भी क्षेत्र का वायु दाब और पवन तंत्र उस स्थान के अक्षांश और ऊँचाई पर निर्भर करता है।
  • इस प्रकार यह तापमान और वर्षा के वितरण को प्रभावित करता है।
  • समुद्र का जलवायु पर समकारी प्रभाव पड़ता है, जैसे-जैसे समुद्र से दूरी बढ़ती है यह प्रभाव कम होता जाता है और लोग विषम मौसमी स्थितियों को महसूस करते हैं।
  • इसे महाद्वीपीय स्थिति (गर्मी में बहुत अधिक गर्म और सर्दी में बहुत अधिक ठंडा) कहते हैं।
  • महासागरीय धाराएँ समुद्र से तट की ओर चलने वाली हवाओं के साथ तटीय क्षेत्रों की जलवायु को प्रभावित करती हैं।
  • उदाहरण के लिए, कोई भी तटीय क्षेत्र जहाँ गर्म या ठंडी जलधाराएँ बहती हैं और वायु की दिशा समुद्र से तट की ओर है, तो वह तट गर्म या ठंडा हो जाएगा।
  • विश्व के अधिकतर मरुस्थल उपोष्ण कटिबंधीय भागों में फलित महाद्वीपों के पश्चिमी किनारे पर क्यों स्थित हैं?
  • अंत में, किसी स्थान की जलवायु को निर्धारित करने में उच्चावच की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
  • ऊँचे पर्वत ठंडी या गर्म वायु को अवरुद्ध करते हैं।
  • यदि उनकी ऊँचाई इतनी है कि वे वर्षा लाने वाली वायु के रास्तों को रोकने में सक्षम होते हैं, तो वे उस क्षेत्र में वर्षा का कारण भी बन सकते हैं।
  • पर्वतों के पवनाभिमुख ढाल अपेक्षाकृत सूखे रहते हैं।

भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक

अक्षांश

  • कर्क वृत्त देश के मध्य भाग, पश्चिम में कच्छ के रन से लेकर पूर्व में मिजोरम से होकर गुजरती है।
  • देश का लगभग आधा भाग कर्क वृत्त के दक्षिण में स्थित है, जो उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र है।
  • कर्क वृत्त के उत्तर में स्थित शेष भाग उपोष्ण कटिबंधीय है।
  • इसलिए भारत की जलवायु में उष्ण कटिबंधीय जलवायु और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु दोनों की विशेषताएँ उपस्थित हैं।

ऊँचाई

  • भारत के उत्तर में हिमालय पर्वत है।
  • इसकी औसत ऊँचाई लगभग 6,000 मीटर है।
  • भारत का तटीय क्षेत्र भी विशाल है, जहाँ अधिकतम ऊँचाई लगभग 30 मीटर है।
  • हिमालय मध्य एशिया से आने वाली ठंडी हवाओं को भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवेश करने से रोकता है।
  • इन्हीं कारणों से भारत में उष्ण कटिबंधीय जलवायु है, जो सामान्यतः उष्ण कटिबंधीय देशों की तुलना में ठंडी है।
  • हिमालय की वजह से भारत में गर्मी में अत्यधिक गर्मी नहीं पड़ती और सर्दी में अत्यधिक ठंड नहीं पड़ती।

वायु दाब और पवन

  • भारत की जलवायु पर वायु दाब और सर्फेस पवन का प्रभाव।
  • भूमध्य रेखीय क्षेत्रों में निम्न दाब की पट्टी का निर्माण।
  • गर्मियों में उत्तरी भारत में निम्न दाब की स्थिति विकसित होती है।
  • यह इतना निम्न होता है कि दक्षिणी गोलार्ध की उच्च दाब की हवाएँ इसे भरने के लिए कर्क वृत्त को पार करती हैं।
  • इन्हें दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कहा जाता है।
  • ये हवाएँ हिंद महासागर से जल वाष्प लेकर आती हैं और वर्षा लाती हैं।
  • सर्दियों में उत्तरी भारत में उच्च दाब की स्थिति विकसित होती है।
  • हवाएँ उच्च दाब से निम्न दाब की ओर बहती हैं।
  • इसलिए सर्दियों में पवनें उत्तर-पूर्व की ओर से बहती हैं।
  • इन्हें उत्तर-पूर्व मॉनसून कहा जाता है।
  • ये पवनें बंगाल की खाड़ी से होकर गुजरती हैं और थोड़ी वर्षा लाती हैं।
  • जेट स्ट्रीम: ऊपरी वायुमंडल में तेज गति की हवाएँ, जो उत्तरी गोलार्ध में 27-30 डिग्री अक्षांश पर बहती हैं।
  • ये गर्मियों में हिमालय के उत्तर में और सर्दियों में दक्षिण में बहती हैं।
  • सर्दी में ये पश्चिमी चक्रवात को प्रभावित करती हैं।
  • सर्दी में भूमध्य सागर से पश्चिमी चक्रवात भारत में वर्षा लाते हैं, मुख्यतः उत्तर पश्चिम में।

मॉनसून की प्रकृति

  • मॉनसून एक मौसमी परिवर्तन है जो वायु की दिशा में होता है।
  • मॉनसून का निर्माण कैसे होता है?
  • भूमध्य रेखा के निकट कम दाब की पट्टी का निर्माण।
  • गर्मियों में उत्तरी भारत में कम दाब का विकास।
  • दक्षिणी गोलार्ध में उच्च दाब से हवाएँ कर्क वृत्त को पार कर उत्तर की ओर बहती हैं।
  • ये हवाएँ हिंद महासागर से गुजरती हैं और जल वाष्प लेकर आती हैं, वर्षा लाती हैं।
  • ये दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कहलाती हैं।
  • सर्दी में उत्तरी भारत में उच्च दाब, हवाएँ उत्तर-पूर्व से बहती हैं, उत्तर-पूर्व मॉनसून।
  • मॉनसून की विशेषता: वर्षा का अचानक प्रारंभ (बर्स्ट), वर्षा में ब्रेक, वर्षा का असमान वितरण।
  • मॉनसून वर्षा की अनिश्चितता के कारण भारत में बाढ़ और सूखा दोनों होते हैं।
  • मॉनसून वर्षा पर निर्भर कृषि के लिए चुनौती।
  • मॉनसून की दो शाखाएँ: अरब सागर शाखा (पश्चिमी घाट पर अधिक वर्षा), बंगाल की खाड़ी शाखा (उत्तर पूर्व में अधिक)।
  • मावसिनराम में विश्व की सबसे अधिक वर्षा (1,141 सेमी)।
  • मॉनसून की वापसी में चक्रवात, दक्षिण पूर्व में वर्षा।

ऋतुएँ

भारत में जलवायु को चार मुख्य ऋतुओं में विभाजित किया जाता है:

1. शीत ऋतु (दिसंबर-फरवरी)

  • उत्तरी भाग में ठंडा, दक्षिण में हल्की सर्दी।
  • हिमालय में हिमपात।
  • पश्चिमी चक्रवात से पंजाब, हरियाणा, उत्तर पश्चिम में वर्षा।
  • तमिलनाडु में उत्तर पूर्व मॉनसून से वर्षा।
  • दिल्ली में औसत तापमान 12-15°C, चेन्नई में 24-25°C।
  • दिन छोटे, रात लंबी।
  • लद्दाख में -40°C तक ठंड।

2. ग्रीष्म ऋतु (मार्च-मई)

  • गर्म मौसम, उत्तर में 42°C, देक्कन में 35°C, दक्षिण में कम प्रभाव।
  • स्थानीय पवन: लू (उत्तर में गर्म शुष्क), काल बैसाखी (पश्चिम बंगाल में तूफान), मैंगो शावर (केरल में आम पकाने वाली वर्षा)।
  • अप्रैल में राजस्थान में 45°C, मई में उत्तर पश्चिम में अधिक गर्म।
  • असम में पूर्व मॉनसून वर्षा।

3. अग्रसर मॉनसून (जून-सितंबर)

  • वर्षा की ऋतु, दक्षिण पश्चिम मॉनसून।
  • जून में केरल में प्रारंभ, जुलाई में पूरे देश में।
  • वर्षा की मात्रा पश्चिम से पूर्व घटती है।
  • मेघालय में 400 सेमी से अधिक, राजस्थान में 60 सेमी से कम।
  • वर्षा में ब्रेक, बाढ़ का खतरा।
  • कृषि के लिए महत्वपूर्ण, लेकिन अनिश्चित।

4. प्रत्यावर्ती मॉनसून (अक्टूबर-नवंबर)

  • मॉनसून की वापसी, उत्तर से दक्षिण।
  • अक्टूबर में गर्मी और आर्द्रता (ऑक्टोबर हीट)।
  • तमिलनाडु, आंध्र में चक्रवात से वर्षा।
  • नवंबर में सर्दी प्रारंभ।

वर्षण का वितरण

  • पश्चिमी घाट का पवनाभिमुख ढाल, उत्तर पूर्व, मेघालय में अधिक वर्षा (250 सेमी से अधिक)।
  • राजस्थान, गुजरात, हरियाणा में कम (60 सेमी से कम)।
  • वर्षा का मानचित्र: उच्च वर्षा क्षेत्र – पूर्वी हिमालय, पश्चिमी घाट; कम – थार मरुस्थल, लद्दाख।
  • वार्षिक वर्षा: मावसिनराम 1,141 सेमी, शिलांग 1,000 सेमी, चेरापुंजी 1,080 सेमी।
  • वर्षा की अनिश्चितता से सूखा और बाढ़।
  • जलवायु परिवर्तन से मॉनसून प्रभावित।

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