पाठ – 5
जलवायु
In this post we have given the detailed notes of class 9 SST (Geography) Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी (Natural Vegetation and Wildlife) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 9 exams.
इस पोस्ट में कक्षा 9 के सामाजिक विज्ञान (भूगोल) के पाठ 5 प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी (Natural Vegetation and Wildlife) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 9 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT |
| Class | Class 9 |
| Subject | SST (Geography) |
| Chapter no. | Chapter 5 |
| Chapter Name | प्राकृतिक वनस्पति तथा वन्य प्राणी (Natural Vegetation and Wildlife) |
| Category | Class 9 SST (Geography) Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
परिचय
- क्या आपने कभी अपने स्कूल, घर या आसपास के मैदानों में विभिन्न प्रकार के वृक्ष, झाड़ियाँ, घास और पक्षियों को देखा है? क्या वे एक ही प्रकार के हैं या अलग-अलग तरह के हैं?
- भारत एक विशाल देश है। इसलिए इसमें आप अनेक प्रकार की जीव रूपों की कल्पना कर सकते हैं।
- हमारा देश भारत विश्व के मुख्य 12 जीव विविधता वाले देशों में से एक है।
- लगभग 47,000 विभिन्न जातियों के पौधे पाए जाने के कारण यह देश विश्व में दसवें स्थान पर और एशिया के देशों में चौथे स्थान पर है।
- भारत में लगभग 15,000 फूलों के पौधे हैं जो कि विश्व में फूलों के पौधों का 6 प्रतिशत है।
- इस देश में बहुत से बिना फूलों के पौधे हैं जैसे कि फर्न, शैवाल (एल्गी) तथा कवक (फंजाई) भी पाए जाते हैं।
- भारत में लगभग 90,000 जातियों के जानवर तथा विभिन्न प्रकार की मछलियाँ, ताजे और समुद्री पानी की पाई जाती हैं।
- प्राकृतिक वनस्पति का अर्थ है कि वनस्पति का वह भाग, जो कि मनुष्य की सहायता के बिना अपने आप पैदा होता है और लंबे समय तक उस पर मानवी प्रभाव नहीं पड़ता।
- इसे अक्षत वनस्पति कहते हैं। इसलिए विभिन्न प्रकार की कृषिवृद्ध फसलें, फल और बागान, वनस्पति का भाग तो हैं परंतु प्राकृतिक वनस्पति नहीं है।
- वह वनस्पति जो कि मूल रूप से भारतीय है उसे ‘देशज’ कहते हैं लेकिन जो पौधे भारत के बाहर से आए हैं उन्हें ‘विदेशज पौधे’ कहते हैं।
- वनस्पति-जगत शब्द का अर्थ किसी विशेष क्षेत्र में, किसी समय में पौधों की उत्पत्ति से है। इस तरह प्राणी जगत जानवरों के विषय में बताता है।
India Natural vegetation.svg - Wikipedia
वनस्पति के प्रकार
हमारे देश में निम्न प्रकार की प्राकृतिक वनस्पतियाँ पाई जाती हैं।
(i) उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन
- ये वन पश्चिमी घाटों के अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूहों, असम के ऊपरी भागों तथा तमिलनाडु के तट तक सीमित हैं।
- ये उन क्षेत्रों में भली-भाँति विकसित हैं जहाँ 200 सेमी से अधिक वर्षा के साथ एक छोटे समय के लिए शुष्क ऋतु पाई जाती है।
- इन वनों में वृक्ष 60 मी या इससे अधिक ऊँचाई तक पहुँचते हैं।
- चूँकि ये क्षेत्र वर्ष भर गर्म तथा आर्द्र रहते हैं इसलिए यहाँ हर प्रकार की वनस्पति – वृक्ष, झाड़ियाँ व लताएँ उगती हैं और वनों में इनकी विभिन्न ऊँचाइयों से कई स्तर देखने को मिलते हैं।
- वृक्षों में पत्ते गिरने का कोई निश्चित समय नहीं होता। इसलिए ये वन साल भर हरे-भरे लगते हैं।
- इन वनों में पाए जाने वाले व्यावसायिक महत्व के कुछ वृक्ष एबोनी, महोगनी, रोजवुड, रबर और सिनकोना हैं।
- जानवर: हाथी, बंदर, लेमूर और हिरण। पक्षी, चमगादड़, सुस्ती, साँप और छिपकली भी पाए जाते हैं।
(ii) उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन
- ये भारत में सबसे अधिक विस्तृत हैं।
- ये उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ वर्षा 200 सेमी से 70 सेमी तक होती है।
- ये वन दो मुख्य प्रकार के होते हैं – आर्द्र और शुष्क पर्णपाती।
- आर्द्र पर्णपाती: 200 से 100 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में, पूर्वी भारत, उत्तर पूर्वी राज्य, पश्चिमी ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिमी घाट के पूर्वी ढाल।
- मुख्य वृक्ष: टीक, साल, शीशम, चंदन, खैर, कुसुम, अर्जुन, महुआ।
- शुष्क पर्णपाती: 100 से 70 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में, वर्षा वाले मैदान और निम्न भूमि क्षेत्रों में।
- मुख्य वृक्ष: टीक, साल, पीपल, नीम।
- ये वन ग्रीष्म में पत्तियाँ गिरा देते हैं।
- जानवर: शेर, बाघ, सुअर, हिरण, हाथी। पक्षी, छिपकली, साँप और कछुआ भी पाए जाते हैं।
(iii) उष्ण कटिबंधीय काँटेदार वन तथा झाड़ियाँ
- ये 70 सेमी से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
- मुख्यतः गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्य प्रदेश के उत्तर पश्चिमी भाग।
- मुख्य वनस्पति: बबूल, खजूर, युकोलिप्टस और कैक्टस।
- पत्तियाँ छोटी होती हैं और जड़ें लंबी, पानी संग्रहित करने के लिए।
- जानवर: ऊँट, चूहे, लोमड़ी, भेड़िया, शेर, जंगली गधा।
(iv) पर्वतीय वन
- ऊँचाई के साथ वनस्पति में परिवर्तन।
- दक्षिण में 1,500-3,000 मी ऊँचाई पर आर्द्र शीतोष्ण वन: सदाबहार चौड़ी पत्ती वाले वृक्ष जैसे ओक और चेस्टनट।
- 3,000-3,600 मी पर शीतोष्ण वन: चीड़, देवदार, सिल्वर फर, स्प्रूस और बर्च।
- इससे ऊपर अल्पाइन वनस्पति: सिल्वर फर, जुनिपर, पाइन और बर्च।
- ऊपर टुंड्रा वनस्पति: मॉस और लाइकेन।
- जानवर: कश्मीर हिरण, स्पॉटेड डियर, जंगली भेड़, जैक रैबिट, तिब्बती एंटीलोप, याक, स्नो लेपर्ड, भालू, रेड पांडा, भेड़ और बकरी।
(v) मैंग्रोव वन
- ये ज्वारीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहाँ कीचड़ और गाद जमा होती है।
- मुख्यतः गंगा, महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी के डेल्टा में।
- सुंदरबन में सुंदरी वृक्ष पाए जाते हैं, नाम इसी से।
- जानवर: रॉयल बंगाल टाइगर, कछुए, मगरमच्छ, घड़ियाल, साँप।
- ये वन ज्वार से प्रभावित, जड़ें पानी से ऊपर।
वन्य प्राणी
- भारत में विभिन्न प्रकार के वन्य प्राणी पाए जाते हैं।
- हाथी: असम, कर्नाटक, केरल में वर्षा वाले वनों में।
- एक सींग वाला गैंडा: असम और पश्चिम बंगाल के दलदली जंगलों में।
- जंगली गधा: रन ऑफ कच्छ में, ऊँट थार मरुस्थल में।
- याक, तिब्बती एंटीलोप, भ्रंग और शिली भेड़ हिमालय में।
- रॉयल बंगाल टाइगर: सुंदरबन में।
- शेर और बाघ: गिर वन और मध्य प्रदेश में।
- पक्षी: मोर, बतख, तोता, सारस, क्रेन।
- भारत में 89 राष्ट्रीय उद्यान, 18 जैव आरक्षित क्षेत्र और 490 वन्य जीव अभयारण्य हैं।
- प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट राइनो, प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड।

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