पाठ – 2
यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति
In this post we have given the detailed notes of class 9 SST (History) Chapter 2 यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति (Socialism in Europe and the Russian Revolution) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 9 exams.
इस पोस्ट में कक्षा 9 के सामाजिक विज्ञान (इतिहास) के पाठ 2 यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति (Socialism in Europe and the Russian Revolution) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 9 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT |
| Class | Class 9 |
| Subject | Class 9 SST (History) Notes in Hindi |
| Chapter no. | Chapter 2 |
| Chapter Name | यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति (Socialism in Europe and the Russian Revolution) |
| Category | Class 9 SST (History) Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
परिचय
यह अध्याय 19वीं शताब्दी में यूरोप में समाजवाद के उदय और रूसी क्रांति (1917) पर चर्चा करता है। फ्रांसीसी क्रांति के बाद स्वतंत्रता और समानता के विचार फैले, लेकिन सामाजिक परिवर्तन पर विभिन्न मत थे। अध्याय में लिबरल्स, रेडिकल्स, कंजर्वेटिव्स और समाजवाद की चर्चा है। रूसी क्रांति ने समाजवाद को व्यावहारिक रूप दिया और विश्व पर प्रभाव डाला।
सामाजिक परिवर्तन का युग
फ्रांसीसी क्रांति ने सामाजिक संरचना में बदलाव की संभावनाएं दिखाईं। यूरोप में व्यक्तिगत अधिकारों और सामाजिक सत्ता पर बहस छिड़ गई। भारत में राममोहन राय और दयानंद सरस्वती ने फ्रांसीसी क्रांति का उल्लेख किया। उपनिवेशों में घटनाओं ने इन विचारों को नया रूप दिया।
लिबरल्स, रेडिकल्स और कंजर्वेटिव्स
- लिबरल्स: सभी धर्मों को समान सम्मान, निरंकुश सत्ता के विरोधी, व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा। प्रतिनिधित्व पर आधारित निर्वाचित सरकार, लेकिन सार्वभौमिक मताधिकार के विरुद्ध (केवल संपत्तिधारियों को वोट)।
- रेडिकल्स: बहुमत पर आधारित सरकार, महिला मताधिकार, निजी संपत्ति का विरोध (केवल कुछ लोगों के पास एकाग्रता के विरुद्ध)।
- कंजर्वेटिव्स: परिवर्तन के विरुद्ध, लेकिन फ्रांसीसी क्रांति के बाद धीरे-धीरे बदलाव स्वीकार। अतीत का सम्मान, धीमी प्रक्रिया।
औद्योगिक समाज और सामाजिक परिवर्तन
औद्योगीकरण से नए शहर, रेलवे, औद्योगिक क्षेत्र बने। महिलाएं-पुरुष-बच्चे फैक्टरियों में काम करने लगे। लंबी पाली, कम मजदूरी, बेरोजगारी। शहर तेजी से फैले, आवास-सफाई की समस्या। लिबरल्स और रेडिकल्स समस्याओं का हल खोजते थे। उद्योग व्यक्तिगत स्वामित्व में, व्यक्तिगत प्रयास, श्रम और उद्यमशीलता पर विश्वास।
यूरोप में समाजवाद का आगमन
समाजवाद संपत्ति के निजी स्वामित्व का विरोधी। संपत्तिधारी लाभ से ही मतलब रखते हैं, श्रमिकों के बारे में नहीं। यदि संपत्ति पर समाज का नियंत्रण हो तो सामाजिक हितों पर ध्यान दिया जा सकता। समाजवादी सहकारी या सामूहिक उद्यम पसंद करते थे। रॉबर्ट ओवेन ने अमेरिका में न्यू हार्मनी नामक सहकारी समुदाय बनाया। लुई ब्लांक ने सरकार से सहकारी उद्यमों को बढ़ावा देने की मांग की।
क्रियाकलाप: निजी संपत्ति समाप्त करने पर आपके इलाके में बैठक बुलाई गई। गरीब किसान, मध्यम भूस्वामी, गृहिणी के रूप में भाषण लिखें। पूंजीवादी और समाजवादी विचारधारा में दो अंतर बताएं।
कार्ल मार्क्स (1818-1883) और फ्रेडरिक एंगेल्स (1820-1895) ने नए तर्क दिए। औद्योगिक समाज पूंजीवादी, फैक्टरियों में पूंजीपतियों का स्वामित्व, मजदूरों का शोषण। मार्क्स का मानना: पूंजीवाद समाप्त होने तक मजदूरों की स्थिति में सुधार नहीं। मजदूरों को पूंजीवाद उखाड़ फेंकना होगा, समाजवादी समाज बनाना जहां संपत्ति पर सामाजिक नियंत्रण। भविष्य का समाज कम्युनिस्ट समाज। संघर्ष में मजदूरों की जीत।

Karl Marx - Wikipedia
समाजवाद के लिए समर्थन
1870 तक यूरोप में समाजवादियों ने सेकंड इंटरनेशनल नामक अंतरराष्ट्रीय संस्था बनाई। इंग्लैंड और जर्मनी में मजदूरों ने यूनियन बनाई, हड़तालें की। जर्मनी में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े। फ्रांस में सोशलिस्ट पार्टी। 1914 तक समाजवादी सरकार नहीं बना सके।
रूसी क्रांति
रूसी क्रांति की कहानी।
रूसी साम्राज्य, 1914
रूस और उसके साम्राज्य पर tsar Nicholas II का शासन। साम्राज्य प्रशांत महासागर तक फैला। रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च से निकली शाखा रूसी ऑर्थोडॉक्स ईसाई धर्म को मानने वाले बहुमत। कैथोलिक, प्रोटेस्टेंट, मुस्लिम और बौद्ध भी शामिल।
Nicholas II - Wikipedia
अर्थव्यवस्था और समाज
20वीं सदी की शुरुआत में रूस की आबादी का बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर। यूरोप के किसी देश में इतना प्रतिशत नहीं। किसान बाजार के लिए भी उत्पादन करते। उद्योग कम, सेंट पीटर्सबर्ग और मॉस्को प्रमुख। बड़े-बड़े कारखाने, 1890 में रेल नेटवर्क फैला। विदेशी निवेश बढ़ा। कोयला और स्टील उत्पादन बढ़ा। कारखाने व्यक्तिगत स्वामित्व में। मजदूरी न्यूनतम, पाली 15 घंटे। आवास: कमरे से डॉरमिटरी। मजदूर बंटे हुए, कुछ गांव से जुड़े। महिलाओं की संख्या 31%, कम वेतन। किसान धार्मिक, सामंतों का सम्मान नहीं। भूमि समुदाय (मीर) को सौंपते, परिवार की जरूरत अनुसार बांटते।
रूस में समाजवाद
1914 से पहले सभी राजनीतिक पार्टियां गैरकानूनी। मार्क्सवादियों ने 1898 में रूसी सोशल डेमोक्रेटिक वर्कर्स पार्टी बनाई। सरकार के आतंक से गुप्त काम। मजदूरों को संगठित, हड़तालें। कुछ समाजवादियों को लगता किसान स्वाभाविक समाजवादी, क्रांति का नेतृत्व करेंगे। लेनिन (बोल्शेविकों के मुखिया) पार्टी अनुशासित होनी चाहिए। दूसरा खेमा (मेंशेविक) सभी को सदस्यता।
उथल-पुथल का समय: 1905 की क्रांति
रूस निरंकुश राजतंत्र। tsar Nicholas II निरंकुश। 1904 बुरा साल, कीमतें बढ़ीं। 1904 में गठित एसेंबली ऑफ रूशियन वर्कर्स के 4 सदस्यों को निकाला तो हड़ताल। पादरी गैपोन के नेतृत्व में मजदूर विंटर पैलेस पहुंचे, पुलिस-कोसैक्स ने गोलीबारी। घटना ब्लडी संडे। देश में हड़तालें, विश्वविद्यालय बंद। यूनियनों की स्थापना। tsar ने निर्वाचित सलाहकार संसद (दुमा) बनाने पर सहमति दी।
1914 में दो यूरोपीय गठबंधन: जर्मनी, ऑस्ट्रिया, तुर्की (केंद्रीय शक्तियां) vs फ्रांस, ब्रिटेन, रूस (बाद में इटली, रोमानिया)। यूरोपीय उपनिवेशों के कारण यूरोप से बाहर फैला। पहला विश्वयुद्ध। tsar Nicholas II को युद्ध का समर्थन। लेकिन जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंचा, tsar दुमा पर सलाह लेना बंद। जर्मन मूल की tsarina (महारानी) और उसके सलाहकार रास्पुटिन ने tsar को अलोकप्रिय बनाया। पूर्वी मोर्चे पर सैनिकों की हार। 1914-1916 में जर्मनी और ऑस्ट्रिया में रूसी सेनाओं की हार। 1917 तक 70 लाख मारे गए। फसलें, इमारतें नष्ट। शहरों में रोटी-अनाज की कमी।
पेट्रोग्राड में फरवरी क्रांति
1917 की सर्दियों में पेट्रोग्राड की हालत खराब। फैक्टरियां नेवा नदी के दाएं तट पर। बाएं पर फैशनेबल इलाके, विंटर पैलेस, सरकारी इमारतें। फरवरी में खाद्य पदार्थों की कमी। संसदीय प्रतिनिधि चाहते tsar प्रोविजनल गवर्नमेंट बचा रहे। 22 फरवरी को लॉकआउट। अगले दिन 50 फैक्टरियों के मजदूर समर्थन में हड़ताल। महिलाएं नेतृत्व कर रही थीं। दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस। प्रदर्शनकारी राजधानी के बीच-नेवस्की प्रॉस्पेक्ट तक आए। सरकार ने कर्फ्यू लगाया। 24-25 तारीख को प्रदर्शनकारी तितर-बितर। 25 को सरकार ने दुमा भंग की। 26 को प्रदर्शनकारी इकट्ठे। 27 को पुलिस मुख्यालय तहस-नहस। सैनिकों-मजदूरों ने सोवियत या परिषद बनाई। अगले दिन प्रतिनिधिमंडल tsar से मिला, पद त्यागने की सलाह। tsar ने माना, 2 मार्च को गद्दी छोड़ी। सोवियत और दुमा नेताओं ने प्रोविजनल गवर्नमेंट बनाई। संविधान सभा का चुनाव सार्वभौमिक मताधिकार पर। फरवरी क्रांति महिलाओं के हाथों।
फरवरी के बाद
प्रोविजनल गवर्नमेंट में सैनिक अधिकारी, भूस्वामी, उद्योगपति प्रभावशाली। लिबरल्स और समाजवादी जल्दी निर्वाचित सरकार चाहते। सभा-संघ बनाने पर पाबंदी हटी। अप्रैल में बोल्शेविक नेता व्लादिमीर लेनिन रूस लौटे। अप्रैल थीसिस: युद्ध खत्म, भूमि किसानों को, बैंकों का राष्ट्रीयकरण।
अक्टूबर 1917 की क्रांति
प्रोविजनल गवर्नमेंट और बोल्शेविकों में टकराव बढ़ा। लेनिन को tsar की निरंकुशता का आरोप। जुलाई में लेनिन टर्की में छिपे। गांवों में किसान-समाजवादी क्रांतिकारी नेता भूमि पुनर्वितरण के लिए दबाव। अगस्त से सितंबर में किसानों ने बहुत सी भूमि पर कब्जा। सितंबर में बोल्शेविकों ने प्रोविजनल गवर्नमेंट के खिलाफ विद्रोह की चर्चा। सैनिक क्रांतिकारी समिति गठित लियोन ट्रॉट्स्की के नेतृत्व में। 24 अक्टूबर को विद्रोह शुरू। प्रधानमंत्री केरेन्सकी ने सैनिक टुकड़ियां बुलाईं। लेकिन बोल्शेविक समर्थक सैनिकों ने सरकारी कार्यालयों पर कब्जा, मंत्रियों को गिरफ्तार। पेट्रोग्राड में ऑल रूशियन कांग्रेस ऑफ सोवियेट्स की बैठक में बहुमत ने बोल्शेविक कार्रवाई का समर्थन। अन्य शहरों में विद्रोह। दिसंबर तक मॉस्को-पेट्रोग्राड इलाके पर बोल्शेविक कब्जा।

Russian Revolution | Definition, Causes, Summary, History, & Facts | Britannica
अक्टूबर के बाद क्या बदला
बोल्शेविक निजी संपत्ति के पूरी तरह खिलाफ। अधिकतर उद्योग-बैंक नवंबर 1917 में राष्ट्रीयकरण। भूमि सामाजिक संपत्ति। किसानों को भूमि सौंपी। शहरों में बोल्शेविकों ने बड़े घरों के छोटे हिस्से। पुरानी वर्दियां बदलीं। 1918 में परिधान प्रतियोगिता, सोवियेट टोपी (बुदेनोवका) चुनी। बोल्शेविक पार्टी का नाम रूसी कम्युनिस्ट पार्टी (बोल्शेविक)। नवंबर 1917 में संविधान सभा चुनाव, लेकिन बोल्शेविकों को बहुमत नहीं। लेनिन ने असेंबली भंग की। ऑल रूशियन कांग्रेस ऑफ सोवियेट्स संसद। रूस एकदलीय राजनीतिक व्यवस्था। ट्रेड यूनियनों पर पार्टी नियंत्रण। गुप्त पुलिस (चेका, बाद ओजीपीयू, एनकेवीडी)। बहुत से युवा लेखक-कलाकार पार्टी से आकर्षित, लेकिन सेंसरशिप से मोहभंग।
गृह युद्ध
जब बोल्शेविकों ने भूमि पुनर्वितरण का आदेश दिया, रूसी सेना टूटने लगी। गैर-बोल्शेविक समाजवादी, लिबरल्स, tsar समर्थक बोल्शेविक विद्रोह की निंदा। उनके नेता दक्षिणी रूस में इकट्ठे, बोल्शेविकों (रेड्स) से लड़ने टुकड़ियां। 1918-1919 में रूसी साम्राज्य के अधिकतर हिस्सों पर सामाजिक क्रांतिकारियों (ग्रीन्स) और tsar समर्थकों (व्हाइट्स) का नियंत्रण। फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, जापानी टुकड़ियां समर्थन। ये सभी शक्तियां रूस में समाजवाद फैलने से रोकना चाहतीं। गृह युद्ध में लूटमार, डकैती, भुखमरी।
समाजवादी समाज का निर्माण
गृह युद्ध में बोल्शेविकों ने उद्योगों-बैंकों का राष्ट्रीयकरण जारी। नियोजित अर्थव्यवस्था। केंद्रीय नियोजन। पांच वर्षीय योजनाएं। पहली दो योजनाएं (1927-1932, 1933-1938) में औद्योगिक विकास पर जोर। कीमतें स्थिर। नियोजित अर्थव्यवस्था से आर्थिक विकास को गति। औद्योगिक उत्पादन बढ़ा। नए औद्योगिक शहर बने। लेकिन तेज निर्माण से कार्यस्थितियां खराब। मैग्निटोगोर्स्क शहर में स्टील प्लांट तीन साल में पूरा। मजदूरों को कड़ी सर्दी में संघर्ष। विस्तारित शिक्षा, फैक्टरी मजदूरों-किसानों को विश्वविद्यालय में विशेष व्यवस्था। सस्ती स्वास्थ्य सेवा। आदर्श रिहायशी घर। लेकिन संसाधन सीमित से सभी जगह एक जैसे परिणाम नहीं।
नियोजित अर्थव्यवस्था का शुरुआती दौर खेती के सामूहिकीकरण से जुड़ा। 1927-1928 में शहरों में अनाज संकट। सरकार ने कीमतें तय की। लेकिन किसान उस कीमत पर बेचने को तैयार नहीं। स्टालिन को लगा अमीर किसान और व्यापारी कीमत बढ़ने की उम्मीद में अनाज नहीं बेच रहे। स्थिति पर काबू के लिए स्टेट पर अंकुश, व्यापारियों के जमाव अनाज जब्त। 1928 में पार्टी सदस्यों ने अनाज उत्पादक इलाकों का दौरा। अनाज जब्त, ‘कुलकों’ के ठिकानों पर छापे। अनाज की कमी बनी रही तो खेतों के सामूहिकीकरण का फैसला। छोटे खेतों से आधुनिकीकरण नहीं। कुलकों का सफाया, किसानों से भूमि छीन, राज्य नियंत्रित विशालकाय खेत। स्टालिन का सामूहिकीकरण कार्यक्रम शुरू। 1929 से पार्टी ने सभी किसानों को सामूहिक खेतों (कोलखोज) में काम का आदेश। अधिकतर भूमि और जानवर सामूहिक खेतों के स्वामित्व में। विरोध करने वाले किसानों को सख्त सजा। 1929-1931 में पशुओं की संख्या में एक-तिहाई कमी। सामूहिकीकरण के विरोध में किसानों का कहना वे न अमीर हैं न समाजवाद विरोधी। स्टालिन सरकार ने सीमित स्तर पर स्वतंत्र किसान को जारी रखा लेकिन विशेष मदद नहीं। सामूहिकीकरण से उत्पादन में नाटकीय वृद्धि नहीं। 1930-1933 की खराब फसल से इतिहास का सबसे बड़ा अकाल, 40 लाख से अधिक मरे।

Collectivization in the Soviet Union - Wikipedia
पार्टी में बहुत से लोग नियोजित अर्थव्यवस्था में औद्योगिक उत्पादन में भ्रम, सामूहिकीकरण के परिणामों की आलोचना। स्टालिन और सहयोगियों ने आलोचकों पर समाजवाद विरोधी साजिश का आरोप। देश भर में बहुतों पर आरोप, 1939 तक 20 लाख से अधिक जेल या श्रम शिविर। बहुत से प्रतिभावान पेशेवर।

Portrait of Joseph Stalin' Giclee Print | AllPosters.com
रूसी क्रांति और सोवियत संघ का वैश्विक प्रभाव
रूसी क्रांति से प्रेरित बहुत से भारतीय। कुछ ने कम्युनिस्ट विश्वविद्यालय में शिक्षा। 1920 में भारत में कम्युनिस्ट पार्टी। भारत, चीन, यूरोप में कोमिंटर्न के प्रमुख नेता। जवाहरलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर ने सोवियत संघ का दौरा। सोवियत संघ की अलग-अलग छवियां।
महत्वपूर्ण शब्दावली
- मताधिकार आंदोलन: वोट डालने का अधिकार पाने का आंदोलन।
- लिबरल्स: उदारवादी।
- रेडिकल्स: कट्टरपंथी।
- कंजर्वेटिव्स: रूढ़िवादी।
- डेमोक्रेट: लोकतंत्रवादी।
- कम्युनिस्ट: साम्यवादी।
- सोवियत: परिषद।
- कोलखोज: सामूहिक खेत।
- कुलक: अमीर किसान।
- दुमा: रूसी संसद।
- चेका: गुप्त पुलिस।
- कोमिंटर्न: कम्युनिस्ट इंटरनेशनल।
- बोल्शेविक: बहुमत वाले।
- मेंशेविक: अल्पमत वाले।
महत्वपूर्ण तिथियां
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1815 | नई सरकारें बनीं, राष्ट्रवादी-उदारवादी-कट्टरपंथी क्रांति के पक्ष में |
| 1870 | समाजवादियों ने सेकंड इंटरनेशनल बनाई |
| 1898 | रूसी सोशल डेमोक्रेटिक वर्कर्स पार्टी |
| 1905 | ब्लडी संडे, 1905 क्रांति |
| 1914 | प्रथम विश्वयुद्ध शुरू |
| 1917 | फरवरी क्रांति, tsar का पद त्याग; अक्टूबर क्रांति |
| 1918-20 | गृह युद्ध |
| 1919 | कोमिंटर्न गठन |
| 1929 | सामूहिकीकरण शुरू |
| 1929-33 | अकाल |
We hope that class 9 SST (History) Chapter 2 यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति (Socialism in Europe and the Russian Revolution) notes in Hindi helped you. If you have any query about class 9 SST (History) Chapter 2 यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति (Socialism in Europe and the Russian Revolution) notes in Hindi or about any other notes of class 9 SST in Hindi, so you can comment below. We will reach you as soon as possible…