पाठ – 4
कृषि
In this post we have given the detailed notes of class 10 SST (Geography) Chapter 4 कृषि (Agriculture) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 10 exams.
इस पोस्ट में कक्षा 10 के सामाजिक विज्ञान (भूगोल) के पाठ 4 कृषि (Agriculture) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 10 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT |
| Class | Class 10 |
| Subject | SST (Geography) |
| Chapter no. | Chapter 4 |
| Chapter Name | कृषि (Agriculture) |
| Category | Class 10 SST (Geography) Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
परिचय: भारत में कृषि का महत्व
- भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ की दो-तिहाई जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है।
- कृषि एक प्राथमिक क्रिया है जो अधिकांश खाद्यान्न उत्पन्न करती है।
- यह विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल भी प्रदान करती है, जैसे कपास, गन्ना आदि।
- कुछ उत्पाद जैसे चाय, कॉफी, और मसालों का निर्यात भी किया जाता है।
कृषि के प्रकार
भारत में भौतिक पर्यावरण, प्रौद्योगिकी और सामाजिक-सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के आधार पर विभिन्न प्रकार की कृषि प्रणालियाँ अपनाई जाती हैं।
प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि
- विवरण: यह भूमि के छोटे टुकड़ों पर आदिम औजारों (लकड़ी के हल, खुदाई करने वाली छड़ी) और परिवार/समुदाय के श्रम से की जाती है। यह मानसून और भूमि की प्राकृतिक उर्वरता पर निर्भर करती है।
- विशेषताएँ: यह कर्तन दहन प्रणाली (Slash and Burn) पर आधारित है, जिसे ‘झूम खेती’ भी कहते हैं। किसान ज़मीन के टुकड़े साफ़ करके खेती करते हैं और उर्वरता कम होने पर दूसरी जगह चले जाते हैं। इसमें उत्पादकता कम होती है।
गहन जीविका कृषि
- विवरण: यह उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है। इसमें श्रम-गहन तकनीकों का उपयोग होता है।
- विशेषताएँ: अधिक उत्पादन के लिए जैव-रासायनिक निवेशों और सिंचाई का प्रयोग किया जाता है। भू-स्वामित्व में विरासत के अधिकार के कारण जोतों का आकार छोटा होता जाता है।
वाणिज्यिक कृषि
- विवरण: इस कृषि का मुख्य उद्देश्य उच्च पैदावार प्राप्त करना और बाज़ार में बेचना है। इसमें आधुनिक तकनीकों का प्रयोग होता है।
- विशेषताएँ: अधिक पैदावार देने वाले बीज (HYV), रासायनिक उर्वरक, और कीटनाशकों का प्रयोग होता है। रोपण कृषि इसका एक उदाहरण है (चाय, कॉफी, गन्ना, केला)।
शस्य प्रारूप (Cropping Pattern)
भारत में तीन प्रमुख फसल ऋतुएँ हैं:
|
फसल ऋतु |
बुआई का समय |
कटाई का समय |
प्रमुख फसलें |
प्रमुख राज्य |
|---|---|---|---|---|
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रबी |
शीत ऋतु (अक्तूबर – दिसंबर) |
ग्रीष्म ऋतु (अप्रैल – जून) |
गेहूँ, जौ, मटर, चना, सरसों |
पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड |
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खरीफ |
मानसून का आगमन (जून – जुलाई) |
सितंबर – अक्तूबर |
चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास, जूट, मूँगफली |
असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र |
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जायद |
रबी और खरीफ के बीच (मार्च – जून) |
– |
तरबूज, खरबूजा, खीरा, सब्जियाँ, चारे की फसलें |
– |
भारत की मुख्य फसलें
(क) खाद्यान्न फसलें
- चावल:
- विवरण: भारत की मुख्य खाद्य फसल (चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक)। यह एक खरीफ फसल है।
- आवश्यकता: उच्च तापमान (25°C से ऊपर) और अधिक आर्द्रता (100 सेमी से अधिक वर्षा)।
- प्रमुख राज्य: पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु।
- गेहूँ:
- विवरण: भारत की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल। यह एक रबी फसल है।
- आवश्यकता: शीत ऋतु और पकने के समय खिली धूप, 50 से 75 सेमी वार्षिक वर्षा।
- प्रमुख राज्य: पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान।
- मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा, रागी):
- विवरण: पोषक तत्वों से भरपूर। ज्वार वर्षा पर निर्भर फसल है, बाजरा बलुआ मिट्टी पर और रागी शुष्क प्रदेशों की फसल है।
- प्रमुख राज्य: ज्वार (महाराष्ट्र, कर्नाटक), बाजरा (राजस्थान, उत्तर प्रदेश), रागी (कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश)।
- मक्का:
- विवरण: खाद्यान्न व चारा दोनों रूपों में प्रयोग। यह एक खरीफ फसल है।
- आवश्यकता: 21°C से 27°C तापमान, पुरानी जलोढ़ मिट्टी।
- प्रमुख राज्य: कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश।
- दालें:
- विवरण: भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। ये प्रोटीन का मुख्य स्रोत हैं और भूमि की उर्वरता बनाए रखती हैं।
- प्रमुख राज्य: मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक।
(ख) अखाद्य फसलें और अन्य खाद्य फसलें
- गन्ना:
- विवरण: उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय फसल। ब्राजील के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
- आवश्यकता: 21°C से 27°C तापमान, 75 से 100 सेमी वर्षा।
- प्रमुख राज्य: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, बिहार।
- तिलहन:
- विवरण: मूँगफली, सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी आदि। मूँगफली मुख्य खरीफ फसल है।
- प्रमुख राज्य: मूँगफली (गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु)।
- चाय:
- विवरण: एक पेय/रोपण फसल।
- आवश्यकता: उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु, ह्यूमस युक्त गहरी मिट्टी, सुगम जल निकास वाले ढलवाँ क्षेत्र।
- प्रमुख राज्य: असम, पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग), तमिलनाडु, केरल।
- कॉफी:
- विवरण: भारत में ‘अरेबिका’ किस्म की कॉफी प्रसिद्ध है।
- प्रमुख राज्य: कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु।
- रबड़:
- विवरण: भूमध्यरेखीय फसल।
- आवश्यकता: 200 सेमी से अधिक वर्षा और 25°C से अधिक तापमान।
- प्रमुख राज्य: केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, अंडमान निकोबार, मेघालय।
- कपास:
- विवरण: ‘सुनहरा रेशा’ भी कहते हैं। दक्कन पठार की काली मिट्टी इसके लिए उपयुक्त है।
- आवश्यकता: उच्च तापमान, हल्की वर्षा, 210 पाला रहित दिन और खिली धूप।
- प्रमुख राज्य: महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब।
प्रौद्योगिकीय और संस्थागत सुधार
- संस्थागत सुधार: स्वतंत्रता के बाद जमींदारी प्रथा का उन्मूलन, जोतों की चकबंदी और सहकारिता को प्राथमिकता दी गई।
- हरित क्रांति और श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड): 1960 और 1970 के दशकों में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए ये रणनीतियाँ शुरू की गईं।
- व्यापक भूमि विकास कार्यक्रम: 1980 और 1990 के दशकों में सूखा, बाढ़, चक्रवात आदि के लिए फसल बीमा का प्रावधान किया गया।
- किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना (PAIS): किसानों को कम दर पर ऋण सुविधा प्रदान करने के लिए शुरू की गई।
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): किसानों को बिचौलियों के शोषण से बचाने के लिए सरकार महत्वपूर्ण फसलों के लिए MSP की घोषणा करती है।
- भूदान-ग्रामदान आंदोलन: विनोबा भावे द्वारा शुरू किया गया यह आंदोलन ‘रक्तहीन क्रांति’ के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें जमींदारों ने स्वेच्छा से भूमिहीनों को भूमि दान की।
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