मुद्रा और साख (CH-3) Notes in Hindi || Class 10 SST Economics Chapter 3 in Hindi ||

पाठ – 3

मुद्रा और साख

In this post we have given the detailed notes of class 10 SST (Economics) Chapter 3 मुद्रा और साख (Money and Credit) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 10 exams.

इस पोस्ट में कक्षा 10 के सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) के पाठ 3 मुद्रा और साख (Money and Credit) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 10 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।

BoardCBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board
TextbookNCERT
ClassClass 10
SubjectSST (Economics)
Chapter no.Chapter 3
Chapter Nameमुद्रा और साख (Money and Credit)
CategoryClass 10 SST (Economics) Notes in Hindi
MediumHindi
Class 10 SST (Economics) Chapter 3 मुद्रा और साख (Money and Credit) in Hindi

मुद्रा: विनिमय का एक माध्यम (Money as a Medium of Exchange)

i. वस्तु विनिमय प्रणाली (Barter System)

यह एक ऐसी प्रणाली है जिसमें मुद्रा का उपयोग किए बिना वस्तुओं का लेन-देन (विनिमय) किया जाता है। (वस्तु के बदले वस्तु)।

आवश्यकताओं का दोहरा संयोग (Double Coincidence of Wants): यह वस्तु विनिमय प्रणाली की एक अनिवार्य शर्त है। इसका अर्थ है कि जो वस्तु एक व्यक्ति बेचना चाहता है, दूसरा व्यक्ति वही वस्तु खरीदने और अपनी वस्तु बेचने पर सहमत हो।

  • समस्या: वास्तविक जीवन में आवश्यकताओं का दोहरा संयोग मिलना अत्यंत कठिन है, जिससे सौदे करना मुश्किल हो जाता है।

ii. मुद्रा की भूमिका

मुद्रा, आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की ज़रूरत को खत्म कर देती है।

  • मुद्रा विनिमय के माध्यम (Medium of Exchange) के रूप में कार्य करती है।
  • कोई भी व्यक्ति अपनी वस्तु बेचकर मुद्रा प्राप्त कर सकता है और फिर उस मुद्रा से अपनी ज़रूरत की कोई भी वस्तु या सेवा खरीद सकता है।

मुद्रा के आधुनिक रूप (Modern Forms of Money)

i. करेंसी (Currency)

  • मुद्रा के आधुनिक रूपों में कागज़ के नोट और सिक्के शामिल हैं।
  • इसे किसी देश की सरकार द्वारा प्राधिकृत (authorized) किया जाता है, इसलिए इसे विनिमय के माध्यम के रूप में स्वीकार किया जाता है।
  • भारत में, भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India – RBI) केंद्र सरकार की ओर से करेंसी नोट जारी करता है।

ii. बैंकों में निक्षेप (Deposits with Banks)

  • लोग अपनी अतिरिक्त मुद्रा को बैंकों में अपने नाम से खाता खोलकर जमा करते हैं। बैंक यह जमा स्वीकार करते हैं और इस पर ब्याज (Interest) भी देते हैं।
  • माँग जमा (Demand Deposit): बैंक खातों में जमा धन को माँगने पर निकाला जा सकता है, इसलिए इसे माँग जमा कहते हैं।

iii. चैक (Cheque)

  • चैक एक ऐसा कागज़ है जो बैंक को किसी व्यक्ति के खाते से, चैक पर लिखे नाम के किसी दूसरे व्यक्ति को, एक विशेष रकम का भुगतान करने का आदेश देता है।
  • माँग जमा की यह सुविधा (चैक द्वारा भुगतान) बिना नकद का इस्तेमाल किए सीधा भुगतान करना संभव बनाती है। इसलिए माँग जमा को भी मुद्रा का एक रूप समझा जाता है।

बैंकों की ऋण संबंधी गतिविधियाँ (Loan Activities of Banks)

बैंक जमाकर्ताओं (जिनके पास अतिरिक्त धन है) और कर्जदारों (जिन्हें धन की ज़रूरत है) के बीच मध्यस्थता (intermediary) का काम करते हैं।

  1. जमा स्वीकार करना: लोग बैंकों में अपनी बचत जमा करते हैं।
  2. नकद भंडार: बैंक जमा राशि का एक छोटा हिस्सा (जैसे भारत में लगभग 15%) अपने पास नकद के रूप में रखते हैं, ताकि जमाकर्ता अपना पैसा निकाल सकें।
  3. ऋण देना: बैंक जमा राशि के एक बड़े भाग को ऋण देने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
  4. आय का स्रोत: बैंक कर्जदारों से लिए गए ब्याज और जमाकर्ताओं को दिए गए ब्याज के बीच के अंतर से आय अर्जित करते हैं।

साख (Credit) की दो विभिन्न स्थितियाँ

साख (ऋण) से हमारा तात्पर्य एक सहमति से है जहाँ उधारदाता, कर्जदार को धन, वस्तुएँ या सेवाएँ मुहैया कराता है और बदले में भविष्य में कर्जदार से भुगतान करने का वादा लेता है।

तालिका 1: साख की सकारात्मक और नकारात्मक भूमिका

स्थिति

सकारात्मक भूमिका (उत्पादक ऋण)

नकारात्मक भूमिका (कर्ज-जाल)

उदाहरण

एक जूता-निर्माता (सलीम) त्योहार के मौसम में उत्पादन के लिए ऋण लेता है, समय पर जूते बनाकर लाभ कमाता है और ऋण चुका देता है।

एक किसान (स्वप्ना) खेती के लिए ऋण लेती है, लेकिन फसल बर्बाद हो जाने के कारण वह कर्ज नहीं चुका पाती और कर्ज-जाल (Debt Trap) में फँस जाती है।

परिणाम

ऋण व्यक्ति की कमाई बढ़ाने में मदद करता है और उसकी स्थिति बेहतर होती है।

ऋण व्यक्ति को ऐसी परिस्थिति में धकेल देता है, जहाँ से बाहर निकलना बहुत कष्टदायक होता है और उसकी स्थिति पहले से बदतर हो जाती है।

ऋण की शर्तें (Terms of Credit)

हर ऋण समझौते में कुछ शर्तें होती हैं, जिन्हें सम्मिलित रूप से ऋण की शर्तें कहा जाता है:

  1. ब्याज दर (Interest Rate): कर्जदार को मूलधन के साथ एक अतिरिक्त राशि के रूप में चुकानी होती है।
  2. समर्थक ऋणाधार (Collateral): यह एक ऐसी संपत्ति है (जैसे भूमि, मकान, गाड़ी, पशु, बैंक जमा) जिसका मालिक कर्जदार है। वह इसे उधारदाता को गारंटी के रूप में देता है। यदि कर्जदार ऋण नहीं चुका पाता तो उधारदाता को यह संपत्ति बेचने का अधिकार होता है।
  3. आवश्यक कागज़ात (Documentation): पहचान पत्र, पते का प्रमाण, आय का प्रमाण आदि।
  4. भुगतान के तरीके (Mode of Repayment): ऋण को किस प्रकार चुकाया जाएगा (जैसे मासिक किश्त)।

भारत में साख के स्रोत (Sources of Credit in India)

ऋण के स्रोतों को दो वर्गों में बांटा जा सकता है:

तालिका 2: औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रक ऋण में अंतर

आधार

औपचारिक क्षेत्रक (Formal Sector)

अनौपचारिक क्षेत्रक (Informal Sector)

स्रोत

बैंक और सहकारी समितियाँ।

साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार, दोस्त।

निगरानी

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) इनकी कार्यप्रणाली पर नज़र रखता है। (जैसे, नकद शेष बनाए रखना, केवल लाभ के लिए ही नहीं बल्कि छोटे किसानों/उद्योगों को भी ऋण देना)।

इनकी गतिविधियों की देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं है।

ब्याज दर

ब्याज दरें आमतौर पर कम और निश्चित होती हैं।

ब्याज दरें बहुत अधिक और अनिश्चित होती हैं। (जैसे 60% वार्षिक)

उद्देश्य

लाभ कमाने के साथ-साथ सामाजिक कल्याण भी एक उद्देश्य है।

मुख्य उद्देश्य केवल लाभ कमाना होता है।

ऋणाधार

आमतौर पर समर्थक ऋणाधार (Collateral) की आवश्यकता होती है।

अक्सर बिना ऋणाधार के भी ऋण मिल जाता है।

विश्लेषण: ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बहुत से लोग ऋण के लिए अनौपचारिक स्रोतों (जैसे साहूकार) पर निर्भर हैं, जहाँ ब्याज दरें बहुत अधिक होती हैं। इसलिए, यह ज़रूरी है कि बैंक और सहकारी समितियाँ ग्रामीण इलाकों में अपनी गतिविधियाँ बढ़ाएँ ताकि सस्ता ऋण उपलब्ध हो सके।

निर्धनों के स्वयं सहायता समूह (Self-Help Groups for the Poor)

समस्या: गरीब परिवारों को बैंकों से ऋण मिलना मुश्किल होता है, क्योंकि उनके पास समर्थक ऋणाधार (Collateral) की कमी होती है।

समाधान: स्वयं सहायता समूह (SHG)

  • संरचना: यह आमतौर पर 15-20 सदस्यों (विशेषकर महिलाओं) का एक समूह होता है, जो नियमित रूप से मिलते हैं और अपनी बचत (जैसे 25 से 100 रुपये) जमा करते हैं।
  • कार्यप्रणाली:
    • समूह अपनी जमा-पूँजी से अपने सदस्यों को छोटी-छोटी ज़रूरतों के लिए कम ब्याज दर पर कर्ज देता है।
    • यदि समूह एक-दो वर्षों तक नियमित रूप से बचत करता है, तो वह बैंक से ऋण लेने के योग्य हो जाता है।
    • बैंक समूह के नाम पर ऋण देता है और ऋण लौटाने की ज़िम्मेदारी पूरे समूह की होती है।
  • लाभ:
    • यह सदस्यों को ऋणाधार की कमी की समस्या से उबरने में मदद करता है।
    • यह ग्रामीण गरीबों, विशेषकर महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी (self-reliant) बनाता है।
    • यह समूह सदस्यों को स्वास्थ्य, पोषण और घरेलू हिंसा जैसे सामाजिक विषयों पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।

We hope that class 10 SST (Economics) Chapter 3 मुद्रा और साख (Money and Credit) notes in Hindi helped you. If you have any query about class 10 SST (Economics) Chapter 3 मुद्रा और साख (Money and Credit) notes in Hindi or about any other notes of class 10 SST in Hindi, so you can comment below. We will reach you as soon as possible…

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