यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय (CH-1) Notes in Hindi || Class 10 SST History Chapter 1 in Hindi ||

पाठ – 1

यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

In this post we have given the detailed notes of class 10 SST (History) Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय (The Rise of Nationalism in Europe) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 10 exams.

इस पोस्ट में कक्षा 10 के सामाजिक विज्ञान (इतिहास) के पाठ 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय (The Rise of Nationalism in Europe) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 10 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।

BoardCBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board
TextbookNCERT
ClassClass 10
SubjectSST (History)
Chapter no.Chapter 1
Chapter Nameयूरोप में राष्ट्रवाद का उदय (The Rise of Nationalism in Europe)
CategoryClass 10 SST (History) Notes in Hindi
MediumHindi
Class 10 SST (History) Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय (The Rise of Nationalism in Europe) in Hindi
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2 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

फ्रांसीसी क्रांति और राष्ट्र का विचार (1789)

राष्ट्रवाद की पहली स्पष्ट अभिव्यक्ति 1789 की फ्रांसीसी क्रांति के साथ हुई। क्रांति ने राजतंत्र से संप्रभुता (प्रभुसत्ता) फ्रांसीसी नागरिकों के समूह में हस्तांतरित कर दी।

सामूहिक पहचान बनाने के लिए उठाए गए कदम

  • पितृभूमि और नागरिक: ‘ला पैट्री’ (पितृभूमि) और ‘ले सिटॉयल’ (नागरिक) जैसे विचारों ने एक संयुक्त समुदाय पर बल दिया, जिसे संविधान के तहत समान अधिकार प्राप्त थे।
  • राष्ट्रीय ध्वज: नया फ्रांसीसी तिरंगा झंडा चुना गया, जिसने पहले के शाही झंडे की जगह ली।
  • नेशनल असेंबली: एस्टेट जेनरल का नाम बदलकर नेशनल असेंबली कर दिया गया और सदस्यों का चुनाव सक्रिय नागरिकों द्वारा किया जाने लगा।
  • प्रशासनिक व्यवस्था: एक केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गई, जिसने सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनाए।
  • शुल्क और माप: आंतरिक आयात-निर्यात शुल्क समाप्त कर दिए गए, तथा भार और नापने की एकसमान व्यवस्था लागू की गई।
  • भाषा: पेरिस में बोली और लिखी जाने वाली फ्रेंच भाषा को राष्ट्र की साझा भाषा बनाया गया, और क्षेत्रीय बोलियों को हतोत्साहित किया गया।

नेपोलियन की संहिता (1804)

नेपोलियन ने लोकतंत्र को नष्ट कर दिया, लेकिन प्रशासनिक क्षेत्र में उसने क्रांतिकारी सिद्धांतों का समावेश किया ताकि व्यवस्था तर्कसंगत और कुशल बन सके।

विशेषताएँ

विवरण

जन्म पर आधारित विशेषाधिकार

समाप्त कर दिए गए।

समानता

कानून के समक्ष बराबरी सुनिश्चित की गई।

संपत्ति का अधिकार

सुरक्षित बनाया गया।

प्रशासनिक विभाजन

सरल बनाया गया (डच गणराज्य, स्विट्जरलैंड, इटली, जर्मनी)।

सामंती व्यवस्था

समाप्त कर दी गई। किसानों को भू-दासत्व और जागीरदारी शुल्कों से मुक्ति मिली।

श्रेणी संघों के नियंत्रण

कारीगरों के श्रेणी-संघों के नियंत्रणों को शहरों से हटा दिया गया।

यूरोप में राष्ट्रवाद का निर्माण

सामाजिक संरचना (18वीं सदी के मध्य में)

  • कुलीन वर्ग (Aristocracy): सबसे प्रभुत्वशाली वर्ग, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जायदाद का मालिक था। संख्या में छोटा, लेकिन राजनीतिक रूप से हावी। वे फ्रेंच भाषा बोलते थे।
  • कृषक वर्ग (Peasantry): जनसंख्या का अधिकांश हिस्सा। पश्चिमी यूरोप में किराएदार और छोटे काश्तकार थे, जबकि पूर्वी और मध्य यूरोप में विशाल जागीरों पर भू-दास खेती करते थे।
  • नया मध्यवर्ग (New Middle Class): औद्योगिक उत्पादन और व्यापार में वृद्धि के कारण शहरों के विकास से उदय हुआ। इसमें उद्योगपति, व्यापारी, डॉक्टर, शिक्षक और सेवा क्षेत्र के लोग शामिल थे। इसी शिक्षित, उदारवादी वर्ग के बीच राष्ट्रीय एकता के विचार लोकप्रिय हुए।

उदारवादी राष्ट्रवाद (Liberalism)

उदारवाद (Liberalism) शब्द लैटिन भाषा के मूल ‘Liber’ पर आधारित है, जिसका अर्थ है ‘आज़ाद’

क्षेत्र

उदारवाद का अर्थ

राजनीतिक क्षेत्र

सहमति से बनी सरकार पर ज़ोर। निरंकुश शासक और पादरी वर्ग के विशेषाधिकारों की समाप्ति। संविधान और संसदीय प्रतिनिधि सरकार की माँग। (सभी को मताधिकार नहीं। केवल संपत्तिवान पुरुषों को अधिकार मिला।)

आर्थिक क्षेत्र

बाजारों की मुक्ति। वस्तुओं और पूँजी के आवागमन पर राज्य द्वारा लगाए गए नियंत्रणों को खत्म करने के पक्ष में।

  • जॉलवेराइन (Zollverein) – 1834: प्रशा की पहल पर स्थापित यह एक शुल्क संघ था, जिसमें अधिकांश जर्मन राज्य शामिल हुए।
    • इसने शुल्क अवरोधों को समाप्त कर दिया।
    • मुद्राओं की संख्या तीस से घटाकर दो कर दी।
    • इसने आर्थिक हितों को राष्ट्रीय एकीकरण का सहायक बनाया (आर्थिक राष्ट्रवाद)।

1815 के बाद रूढ़िवाद और वियना कांग्रेस

रूढ़िवाद (Conservatism): ऐसा राजनीतिक दर्शन जो परंपरा, स्थापित संस्थाओं (जैसे राजतंत्र, चर्च) और रिवाजों पर ज़ोर देता है। 1815 में नेपोलियन की हार के बाद यूरोपीय सरकारें रूढ़िवादी भावना से प्रेरित थीं।

वियना संधि (Treaty of Vienna) – 1815:

  • मेज़बान: ऑस्ट्रिया के चांसलर ड्यूक मैटरनिख
  • उद्देश्य: नेपोलियन द्वारा लाए गए बदलावों को खत्म करना और यूरोप में एक नई रूढ़िवादी व्यवस्था कायम करना।
  • मुख्य निर्णय:
    1. फ्रांसीसी क्रांति के दौरान हटाए गए बूर्बो वंश को सत्ता में बहाल किया गया।
    2. फ्रांस की सीमाओं पर कई राज्य कायम किए गए (जैसे: उत्तर में नीदरलैंड्स का राज्य) ताकि भविष्य में फ्रांस विस्तार न कर सके।
    3. नेपोलियन द्वारा स्थापित 39 राज्यों का जर्मन महासंघ बरकरार रखा गया।
  • ये रूढ़िवादी शासन व्यवस्थाएँ निरंकुश थीं और सेंसरशिप लागू कर उन्होंने फ्रांसीसी क्रांति के विचारों को दबाने की कोशिश की।

छवि सुझाव (Image Suggestion): – यह वियना कांग्रेस के बाद यूरोप की नई राजनीतिक व्यवस्था को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

क्रांतिकारी (The Revolutionaries)

  • दमन के भय से उदारवादी राष्ट्रवादी भूमिगत हो गए और गुप्त संगठन बनाने लगे।
  • ज्युसेपी मेत्सिनी (Giuseppe Mazzini):
    • इटली का क्रांतिकारी, जन्म 1805 में जेनोआ में।
    • गुप्त संगठन: कार्बोनारी का सदस्य। उसने दो और भूमिगत संगठनों की स्थापना की: यंग इटली (मार्सेई) और यंग यूरोप (बर्न)
    • विचारधारा: उसका विश्वास था कि ईश्वर की मर्जी के अनुसार राष्ट्र ही मनुष्यों की प्राकृतिक इकाई थी। इटली को छोटे राज्यों का पैबंद न रहकर एक एकीकृत गणतंत्र बनना चाहिए।
    • मैटरनिख ने मेत्सिनी को ‘हमारी सामाजिक व्यवस्था का सबसे खतरनाक दुश्मन’ बताया।

क्रांतियों का युग: 1830-1848

जुलाई क्रांति (1830) और यूनान का स्वतंत्रता संग्राम

  • जुलाई क्रांति: फ्रांस में हुई, जहाँ बूर्बो राजाओं को उदारवादी क्रांतिकारियों ने उखाड़ फेंका। इसके स्थान पर लुई फिलिप को अध्यक्ष बनाकर एक संवैधानिक राजतंत्र स्थापित किया गया।
  • यूनान का स्वतंत्रता संग्राम (1821):
    • यूनान 15वीं सदी से ऑटोमन साम्राज्य का हिस्सा था।
    • पश्चिमी यूरोप से यूनानी संस्कृति के प्रति सहानुभूति रखने वाले लोगों का समर्थन मिला (जैसे: अंग्रेज कवि लॉर्ड बायरन)।
    • कुस्तुनतुनिया की संधि (1832) ने यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता दी।

रूमानी कल्पना और राष्ट्रीय भावना (Romanticism)

  • रूमानीवाद एक सांस्कृतिक आंदोलन था जिसने तर्क-वितर्क और विज्ञान के महिमामंडन की आलोचना की।
  • जोर: भावनाओं, अंतर्दृष्टि और रहस्यवादी भावनाओं पर।
  • उद्देश्य: एक साझा-सामूहिक विरासत और सांस्कृतिक अतीत को राष्ट्र का आधार बनाना।
  • उदाहरण:
    1. जर्मन दार्शनिक योहान गॉटफ्रीड: दावा किया कि सच्ची जर्मन संस्कृति उसके आम लोगों (दाँस फोल्क – Das Volk) में निहित थी। राष्ट्र की सच्ची आत्मा लोकगीतों, जन-काव्य और लोकनृत्यों (फोल्कगाइस्ट – Volkgeist) से प्रकट होती थी।
    2. पोलैंड: रूस, प्रशा और ऑस्ट्रिया द्वारा विभाजन के बावजूद, संगीत और भाषा के ज़रिये राष्ट्रीय भावना जीवित रखी गई। कैरोल कुर्पिस्की ने अपने ओपेरा और संगीत से राष्ट्रीय संघर्ष का गुणगान किया।
    3. भाषा: रूसी कब्जे के बाद पोलिश भाषा को स्कूलों से हटाकर रूसी भाषा को जबरन लादा गया, जिसके विरोध में पादरियों ने राष्ट्रवादी विरोध के लिए पोलिश भाषा को एक हथियार बनाया।

भूख, कठिनाइयाँ और जन विद्रोह (1848)

  • कारण: 1830 का दशक यूरोप में भारी कठिनाइयाँ लेकर आया।
    • पूरे यूरोप में जनसंख्या में ज़बरदस्त वृद्धि।
    • बेरोजगारी और सस्ते आयातित कपड़ों से लघु उत्पादकों को कड़ी प्रतिस्पर्धा।
    • खाद्य सामग्री के मूल्य बढ़ने या फसल खराब होने से व्यापक गरीबी।
  • परिणाम (फ्रांस):
    • 1848 में पेरिस में लोग सड़कों पर उतर आए। लुई फिलिप को भागने पर मजबूर होना पड़ा।
    • राष्ट्रीय सभा ने गणतंत्र की घोषणा की।
    • 21 वर्ष से ऊपर के सभी वयस्क पुरुषों को मताधिकार प्रदान किया गया और काम के अधिकार की गारंटी दी गई।
  • उदारवादियों की क्रांति (जर्मनी – 1848):
    • जर्मन इलाकों के मध्यवर्ग के स्त्री-पुरुषों ने संविधानवाद को राष्ट्रीय एकीकरण की माँग से जोड़ दिया।
    • फ्रैंकफर्ट संसद: 18 मई 1848 को 831 निर्वाचित प्रतिनिधियों ने फ्रैंकफर्ट संसद में एक जर्मन राष्ट्र के लिए संविधान का प्रारूप तैयार किया।
    • उन्होंने प्रशा के राजा फ्रेडरीख विल्हेम चतुर्थ को ताज पहनाने की पेशकश की, जिसने इसे अस्वीकार कर दिया और निर्वाचित सभा का विरोध किया।
    • अंततः सेना बुलाई गई और एसेंबली भंग कर दी गई।
    • महिलाओं की भूमिका: महिलाओं ने राजनीतिक संगठन स्थापित किए, लेकिन उन्हें एसेंबली के चुनाव के दौरान मताधिकार से वंचित रखा गया और केवल प्रेक्षकों की हैसियत से दर्शक दीर्घा में खड़े होने दिया गया।

जर्मनी और इटली का निर्माण

जर्मनी का एकीकरण

1848 में उदारवादी पहल को राजशाही और फ़ौज ने दबा दिया। इसके बाद प्रशा ने राष्ट्रीय एकीकरण का नेतृत्व संभाला।

चरण/तत्व

मुख्य व्यक्ति/घटना

विवरण

नेतृत्व

ऑटो वॉन बिस्मार्क (प्रशा का प्रमुख मंत्री)

वह ‘जर्मनी के एकीकरण का जनक’ माना जाता है। उसने प्रशा की सेना और नौकरशाही की मदद ली।

प्रक्रिया

सात वर्षों में तीन युद्ध

ऑस्ट्रिया, डेन्मार्क और फ्रांस से युद्धों में प्रशा की जीत हुई।

समापन

जनवरी 1871

वर्साय के हॉल ऑफ मिरर्स में हुए एक समारोह में प्रशा के राजा विलियम प्रथम को जर्मनी का सम्राट घोषित किया गया।

इटली का एकीकरण

19वीं सदी के मध्य में इटली सात राज्यों में बँटा था, जिसमें से केवल एक (सार्डिनिया-पीडमॉण्ट) पर एक इतालवी राजघराने का शासन था।

व्यक्तित्व

भूमिका/योगदान

ज्युसेपी मेत्सिनी

क्रांतिकारी। 1830 के दशक में एकीकृत इतालवी गणराज्य के लिए प्रयास किए। गुप्त संगठन यंग इटली की स्थापना की।

काउंट कैमिलो दे कावूर

मंत्री प्रमुख। इटली के एकीकरण आंदोलन का नेतृत्व किया। फ्रांस से चतुर कूटनीतिक संधि कर 1859 में ऑस्ट्रियाई बलों को हराया।

ज्युसेपी गैरीबॉल्डी

सशस्त्र स्वयंसेवक। 1860 में अपने ‘एक्सपिडिशन ऑफ द थाउजेंड’ (रेड शर्ट्स) का नेतृत्व किया। दक्षिण इटली और दो सिसिलियों के राज्य में स्पेनी शासकों को हटाने में सफल रहे।

विक्टर इमेनुएल द्वितीय

राजा। 1861 में एकीकृत इटली का राजा घोषित किया गया। (वेनिशिया 1866 में और पेपल राज्य 1870 में शामिल हुए।)

ब्रिटेन की अजीब दास्तान

ब्रिटेन में राष्ट्र-राज्य का निर्माण अचानक हुई क्रांति का परिणाम नहीं था, बल्कि एक लंबी प्रक्रिया का नतीजा था।

  • 1688: आंग्ल संसद ने राजतंत्र से ताक़त छीन ली, और इंग्लैंड के केंद्र में एक राष्ट्र-राज्य का निर्माण हुआ।
  • ऐक्ट ऑफ यूनियन (1707): इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के बीच हुआ, जिससे ‘यूनाइटेड किंग्डम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन’ का गठन हुआ। इससे स्कॉटलैंड पर इंग्लैंड का प्रभुत्व बढ़ा।
  • आयरलैंड का विलय (1801): ब्रितानी प्रभाव के विरुद्ध हुए कैथोलिक विद्रोहों को कुचलने के बाद आयरलैंड को बलपूर्वक यूनाइटेड किंग्डम में शामिल कर लिया गया।
  • नए ‘ब्रितानी राष्ट्र’ के प्रतीक (यूनियन जैक, राष्ट्रीय गान) को खूब बढ़ावा दिया गया, और पुरानी संस्कृतियों को दबाया गया।

राष्ट्र की दृश्य-कल्पना

राष्ट्र को एक चेहरा देने के लिए कलाकारों ने राष्ट्रों का मानवीकरण किया, उन्हें नारी भेष में प्रस्तुत किया। यह नारी छवि राष्ट्र का रूपक बन गई।

  • मारीआन (Marianne): फ्रांसीसी राष्ट्र का रूपक।
    • चिह्न: लाल टोपी, तिरंगा और कलगी (ये स्वतंत्रता और गणतंत्र के प्रतीक थे)।
    • महत्व: उसकी प्रतिमाएँ सार्वजनिक चौकों पर लगाई गईं ताकि लोगों को राष्ट्रीय एकता के प्रतीक की याद आती रहे।
  • जर्मेनिया (Germania): जर्मन राष्ट्र का रूपक।
    • मुकुट: बलूत (Oak) वृक्ष के पत्तों का मुकुट पहनती है, जो वीरता का प्रतीक है।

प्रतीकों के अर्थ (रूपक तालिका)

प्रतीक (Symbol)

अर्थ/महत्व (Meaning)

टूटी हुई बेड़ियाँ

आजादी मिलना।

बाज़-छाप कवच

जर्मन साम्राज्य की प्रतीक-शक्ति।

बलूत पत्तियों का मुकुट

बहादुरी।

तलवार

मुकाबले की तैयारी।

तलवार पर लिपटी जैतून की डाली

शांति की चाह।

उगते सूर्य की किरणें

एक नए युग का सूत्रपात।

राष्ट्रवाद और साम्राज्यवाद

  • संकीर्ण राष्ट्रवाद: 1871 के बाद राष्ट्रवाद अपने आदर्शवादी, उदारवादी-जनतांत्रिक स्वभाव से हटकर सीमित लक्ष्यों वाला संकीर्ण सिद्धांत बन गया। राष्ट्रवादी समूह एक-दूसरे के प्रति अनुदार होते गए।
    • बाल्कन क्षेत्र की समस्या: 1871 के बाद यूरोप में गंभीर राष्ट्रवादी तनाव का सबसे बड़ा स्रोत बाल्कन क्षेत्र था।
    • क्षेत्रीय और जातीय भिन्नता: इसमें आधुनिक रोमानिया, बुल्गेरिया, अल्बेनिया, यूनान आदि शामिल थे, और निवासियों को आमतौर पर स्लाव पुकारा जाता था।
    • ऑटोमन साम्राज्य का विघटन: इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा ऑटोमन साम्राज्य के नियंत्रण में था। रूमानी राष्ट्रवाद के विचारों के फैलने और ऑटोमन साम्राज्य के कमज़ोर होने से स्थिति विस्फोटक हो गई।
    • साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्धा: रूस, जर्मनी, इंग्लैंड और ऑस्ट्रो-हंगरी जैसी बड़ी शक्तियों के बीच बाल्कन क्षेत्र में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए गहरी प्रतिस्पर्धा थी।
    • परिणाम: इन प्रतिस्पर्धाओं और बाल्कन राज्यों के आपसी टकरावों ने इस क्षेत्र में कई युद्ध कराए, जिसका अंततः परिणाम प्रथम विश्व युद्ध (1914) हुआ।
  • निष्कर्ष: साम्राज्यवाद से जुड़कर राष्ट्रवाद 1914 में यूरोप को महाविपदा की ओर ले गया। हालाँकि, पूरे विश्व में साम्राज्य विरोधी आंदोलन विकसित हुए और ‘राष्ट्र-राज्य’ में गठित होने का विचार स्वाभाविक और सार्वभौम मान लिया गया।

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