सत्ता की साझेदारी (CH-1) Notes in Hindi || Class 10 SST Political Science Chapter 1 in Hindi ||

पाठ – 1

सत्ता की साझेदारी

In this post we have given the detailed notes of class 10 SST (Political Science) Chapter 1 सत्ता की साझेदारी (Power-sharing) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 10 exams.

इस पोस्ट में कक्षा 10 के सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) के पाठ 1 सत्ता की साझेदारी (Power-sharing) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 10 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।

BoardCBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board
TextbookNCERT
ClassClass 10
SubjectSST (Political Science)
Chapter no.Chapter 1
Chapter Nameसत्ता की साझेदारी (Power-sharing)
CategoryClass 10 SST (Political Science) Notes in Hindi
MediumHindi
Class 10 SST (Political Science) Chapter 1 सत्ता की साझेदारी (Power-sharing) in Hindi

सत्ता की साझेदारी (Power Sharing) वह व्यवस्था है जिसमें शासन की शक्तियाँ किसी एक अंग तक सीमित न रहकर, सरकार के विभिन्न अंगों, स्तरों और सामाजिक समूहों के बीच विभाजित होती हैं। यह लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है।

बेल्जियम और श्रीलंका की कहानियाँ

सत्ता की साझेदारी के महत्व को समझने के लिए दो उदाहरण महत्वपूर्ण हैं:

क) बेल्जियम में साझेदारी (Accommodation in Belgium)

बेल्जियम यूरोप का एक छोटा-सा देश है, जिसकी जटिल जातीय संरचना इस प्रकार थी:

क्षेत्र

जनसंख्या का प्रतिशत

भाषा समूह

फ्लेमिश क्षेत्र

59%

डच (Dutch) भाषी

वालोनिया क्षेत्र

40%

फ्रेंच (French) भाषी

शेष

1%

जर्मन (German) भाषी

राजधानी ब्रुसेल्स

80% फ्रेंच, 20% डच

(जटिल स्थिति)

  • बेल्जियम मॉडल (1970-1993): बेल्जियम के नेताओं ने टकराव से बचने के लिए एक समायोजन मॉडल अपनाया।
    1. केंद्र सरकार: केंद्रीय सरकार में डच और फ्रेंच भाषी मंत्रियों की संख्या समान होगी। किसी भी समूह को एकतरफा निर्णय लेने से रोका गया।
    2. राज्य सरकारें: केंद्र सरकार की कई शक्तियाँ राज्य सरकारों को सौंप दी गईं, और राज्य सरकारें अब केंद्र के अधीन नहीं थीं।
    3. ब्रुसेल्स की अलग सरकार: राजधानी ब्रुसेल्स में दोनों समुदायों को समान प्रतिनिधित्व दिया गया, भले ही यहाँ फ्रेंच बहुसंख्यक थे।
    4. सामुदायिक सरकार (Community Government): भाषा के आधार पर चुनी गई यह सरकार सांस्कृतिक, शैक्षिक और भाषा संबंधी मसलों पर निर्णय लेती थी।
  • परिणाम: इस समझदारी से देश को भाषा के आधार पर टूटने से बचा लिया गया।

ख) श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism in Sri Lanka)

श्रीलंका में जातीय संरचना बेल्जियम से अलग थी, जिसने बहुसंख्यकवाद का मार्ग अपनाया।

भाषा समूह

जनसंख्या का प्रतिशत

सिंहली

74%

तमिल

18% (श्रीलंकाई तमिल और भारतीय तमिल)

  • बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism): यह मान्यता कि बहुसंख्यक समुदाय देश पर उसी तरह शासन कर सकता है, जिस तरह वह चाहता है, और अल्पसंख्यक समुदाय की इच्छाओं और ज़रूरतों की अनदेखी कर सकता है।
  • 1956 का कानून: श्रीलंका की स्वतंत्र सरकार ने सिंहली समुदाय का प्रभुत्व स्थापित करने के लिए कई कदम उठाए:
    1. सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित किया गया, जिससे तमिल भाषा की अनदेखी हुई।
    2. विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में सिंहली को प्राथमिकता दी गई।
    3. बौद्ध धर्म को संरक्षण और बढ़ावा दिया गया।
  • परिणाम: इन कदमों ने तमिलों के बीच बेगानेपन और अलगाव की भावना को जन्म दिया, जिससे दोनों समुदायों के बीच संबंध बिगड़े और देश गृहयुद्ध (Civil War) की ओर धकेल दिया गया।

सत्ता की साझेदारी क्यों ज़रूरी है? (Necessity of Power Sharing)

सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र के लिए दो मुख्य कारणों से वांछनीय है:

क) युक्तिपरक कारण (Prudential Reasons)

  • यह टकराव की संभावना को कम करता है। चूँकि सामाजिक टकराव अक्सर हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता का रूप ले लेता है, इसलिए सत्ता में साझेदारी राजनीतिक व्यवस्था के स्थायित्व के लिए अच्छी है।
  • बहुसंख्यक समुदाय की इच्छा को अल्पसंख्यक पर थोपना देश की एकता के लिए खतरा हो सकता है।

ख) नैतिक कारण (Moral Reasons)

  • सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है।
  • एक वैध लोकतांत्रिक सरकार वह है जिसमें नागरिक भागीदारी के माध्यम से शासन व्यवस्था से जुड़े रहते हैं।
  • नागरिकों को इस बात का अधिकार होता है कि उनसे संबंधित फैसलों में उनकी भागीदारी हो।

सत्ता की साझेदारी के विभिन्न रूप (Forms of Power Sharing)

आधुनिक लोकतंत्रों में सत्ता की साझेदारी विभिन्न तरीकों से की जाती है:

क) सरकार के विभिन्न अंगों के बीच (क्षैतिज वितरण – Horizontal Distribution)

अंग

कार्य

नियंत्रण

विधायिका (Legislature)

कानून बनाना

कार्यपालिका और न्यायपालिका पर नियंत्रण रखती है।

कार्यपालिका (Executive)

कानूनों को लागू करना

विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है।

न्यायपालिका (Judiciary)

कानूनों की व्याख्या करना

कार्यपालिका द्वारा नियुक्त होती है, लेकिन कार्यपालिका और विधायिका के कार्यों पर अंकुश लगाती है।

  • जाँच और संतुलन (Check and Balance): इस व्यवस्था में कोई भी अंग असीमित शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकता, जिससे शक्ति का संतुलन बना रहता है।

ख) विभिन्न स्तरों पर सरकारों के बीच (ऊर्ध्वाधर वितरण – Vertical Distribution)

  • यह पूरे देश के लिए सामान्य सरकार (केंद्र) और प्रांतीय या क्षेत्रीय स्तर पर राज्य सरकारें बनाकर किया जाता है।
  • इस व्यवस्था को संघवाद (Federalism) कहा जाता है।
  • विकेंद्रीकरण: भारत में इसे स्थानीय सरकारों (नगर पालिकाएँ और पंचायतें) तक तीसरे स्तर पर भी ले जाया गया है।

ग) विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच

  • सामुदायिक सरकारें: बेल्जियम में प्रचलित (भाषा/संस्कृति के आधार पर)।
  • आरक्षण: भारत में सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों (SC/ST/OBC) और महिलाओं को विधायिका और प्रशासन में हिस्सेदारी देने के लिए आरक्षण का प्रावधान।

घ) राजनीतिक दलों, दबाव समूहों और आंदोलनों के बीच

  • गठबंधन सरकारें: जब दो या दो से अधिक दल मिलकर चुनाव लड़ते हैं या सरकार बनाते हैं, तो वे सत्ता को आपस में साझा करते हैं।
  • विपक्षी दल: यह सरकार की शक्ति पर नियंत्रण रखता है और शक्ति को निरंकुश होने से रोकता है।
  • दबाव समूह: उद्योगपति, किसान, मजदूर, या पेशेवर वर्ग अपने हितों के लिए सरकार पर दबाव बनाकर निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदारी सुनिश्चित करते हैं।

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