पाठ – 2
संघवाद
In this post we have given the detailed notes of class 10 SST (Political Science) Chapter 2 संघवाद (Federalism) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 10 exams.
इस पोस्ट में कक्षा 10 के सामाजिक विज्ञान (राजनीति विज्ञान) के पाठ 2 संघवाद (Federalism) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 10 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT |
| Class | Class 10 |
| Subject | SST (Political Science) |
| Chapter no. | Chapter 2 |
| Chapter Name | संघवाद (Federalism) |
| Category | Class 10 SST (Political Science) Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
संघवाद (Federalism) सत्ता की साझेदारी का वह रूप है जिसमें सरकार दो या दो से अधिक स्तरों पर विभाजित होती है।
संघवाद क्या है?
संघवाद शासन की एक व्यवस्था है जिसमें सत्ता केंद्रीय प्राधिकरण और देश की विभिन्न संघटक इकाइयों (Constituent units) के बीच विभाजित होती है।
क) संघीय व्यवस्था बनाम एकात्मक व्यवस्था (Federal vs. Unitary System)
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आधार |
संघीय शासन व्यवस्था (Federal System) |
एकात्मक शासन व्यवस्था (Unitary System) |
|---|---|---|
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सरकार के स्तर |
दो या दो से अधिक स्तर (केंद्र और राज्य)। |
शासन का केवल एक स्तर (केंद्र)। |
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सत्ता की स्थिति |
प्रत्येक स्तर अपनी शक्तियों के लिए स्वतंत्र है। |
उप-इकाइयाँ केंद्र सरकार के अधीन होती हैं। |
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जवाबदेही |
राज्य सरकारें केंद्र को जवाबदेह नहीं होतीं। |
स्थानीय/प्रांतीय सरकारें केंद्र को जवाबदेह होती हैं। |
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उदाहरण |
भारत, अमेरिका, बेल्जियम, कनाडा। |
श्रीलंका, फ्रांस, चीन। |
ख) संघवाद की मुख्य विशेषताएँ (Key Features of Federalism)
- दोहरी सरकार: यहाँ सरकार दो या दो से अधिक स्तरों पर होती है।
- समान नागरिकता: एक ही नागरिक समूह पर विभिन्न स्तरों की सरकारें शासन करती हैं, लेकिन प्रत्येक स्तर का अपना अधिकार क्षेत्र होता है।
- संवैधानिक गारंटी: विभिन्न स्तरों की सरकारों के अधिकार क्षेत्र संविधान में स्पष्ट रूप से दर्ज होते हैं।
- न्यायपालिका की भूमिका: न्यायालयों को संविधान और विभिन्न स्तरों की सरकारों के अधिकार क्षेत्रों की व्याख्या करने का अधिकार है। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) इन विवादों में निर्णायक की भूमिका निभाता है।
- वित्त की स्वायत्तता: वित्तीय स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए, विभिन्न स्तरों की सरकारों के लिए राजस्व के स्रोत संविधान में स्पष्ट रूप से निर्धारित होते हैं।
- दोहरे उद्देश्य: यह देश की एकता और सुरक्षा की रक्षा करता है, साथ ही क्षेत्रीय विविधताओं का सम्मान करता है।
संघीय शासन व्यवस्था के प्रकार
संघीय शासन व्यवस्थाएँ दो तरीकों से गठित होती हैं:
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संघीय शासन के तरीके |
विवरण |
उदाहरण |
|---|---|---|
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साथ आकर संघ बनाना (Coming Together) |
इसमें स्वतंत्र राज्य अपनी पहचान बनाए रखने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए स्वैच्छिक रूप से एक बड़ी इकाई बनाते हैं। यहाँ सभी इकाइयों को समान शक्तियाँ मिलती हैं। |
संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया। |
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साथ लेकर संघ बनाना (Holding Together) |
इसमें बड़ा देश अपनी आंतरिक विविधता को समायोजित करने के लिए शक्तियों को राज्यों और केंद्र के बीच बाँट देता है। यहाँ केंद्र सरकार अधिक शक्तिशाली होती है। |
भारत, स्पेन, बेल्जियम। |
भारत एक संघीय देश (India as a Federal Country)
भारतीय संविधान ने मूल रूप से दो-स्तरीय शासन व्यवस्था (केंद्र और राज्य) का प्रावधान किया था, जिसे बाद में त्रि-स्तरीय (स्थानीय सरकार) बनाया गया।
क) शक्तियों का विभाजन (Distribution of Legislative Powers)
संविधान केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विधायी शक्तियों को तीन सूचियों में विभाजित करता है:
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सूची |
विषय |
कानून बनाने का अधिकार |
उदाहरण |
|---|---|---|---|
|
1. संघ सूची (Union List) |
राष्ट्रीय महत्व के विषय। |
केवल केंद्र सरकार। |
रक्षा, विदेशी मामले, बैंकिंग, संचार, मुद्रा। |
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2. राज्य सूची (State List) |
स्थानीय और राज्य स्तर के महत्व के विषय। |
केवल राज्य सरकार। |
पुलिस, व्यापार, वाणिज्य, कृषि, सिंचाई। |
|
3. समवर्ती सूची (Concurrent List) |
साझा हित के विषय। |
केंद्र और राज्य दोनों। (टकराव की स्थिति में केंद्र का कानून मान्य)। |
शिक्षा, वन, मजदूर संघ, विवाह, गोद लेना। |
अवशिष्ट शक्तियाँ (Residuary Subjects): जो विषय किसी भी सूची में नहीं आते, उन पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार को होता है।
ख) विशेष दर्जा प्राप्त राज्य
कुछ राज्यों (जैसे जम्मू और कश्मीर – 370 हटने से पहले, पूर्वोत्तर राज्य) को उनकी विशेष सामाजिक और ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण विशेष शक्तियाँ प्राप्त हैं।
ग) केंद्र शासित प्रदेश (Union Territories)
कुछ छोटी इकाइयों को राज्य का दर्जा नहीं दिया जाता। इन्हें केंद्र शासित प्रदेश कहते हैं, जिन पर सीधे केंद्र सरकार का शासन चलता है (जैसे चंडीगढ़, दिल्ली)।
भारत में संघवाद को सफल बनाने वाली नीतियाँ
संघवाद की सफलता केवल संवैधानिक प्रावधानों पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक राजनीति के स्वभाव पर भी निर्भर करती है।
क) भाषाई राज्य (Linguistic States)
- उद्देश्य: भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन (1950 के दशक के बाद) भारत के लोकतंत्र की पहली और बड़ी परीक्षा थी।
- परिणाम: भाषाई राज्यों के गठन ने देश को अधिक एकजुट और प्रशासन को अधिक सुविधाजनक बनाया।
ख) भाषा नीति (Language Policy)
- राजभाषा: हिंदी को राजभाषा माना गया, लेकिन केवल 40% भारतीयों की मातृभाषा होने के कारण अन्य भाषाओं को भी सम्मान दिया गया।
- मान्यता प्राप्त भाषाएँ: संविधान में हिंदी के अलावा 21 अन्य भाषाओं को भी अनुसूचित भाषा (Scheduled Languages) का दर्जा दिया गया है।
- अंग्रेजी का उपयोग: हिंदी के साथ-साथ सरकारी कामकाज के लिए अंग्रेजी का उपयोग जारी रखने का निर्णय लिया गया, जिससे गैर-हिंदी भाषी राज्यों में विरोध शांत हो गया।
ग) केंद्र-राज्य संबंध
- शुरुआत में: लंबे समय तक, केंद्र में एक ही पार्टी का शासन होने के कारण, केंद्र सरकार अक्सर राज्यों की शक्तियों को अनदेखा करती थी।
- गठबंधन की राजनीति का उदय: 1990 के बाद जब केंद्र में गठबंधन सरकारें बनीं, तो राज्यों की स्वायत्तता और शक्तियों का सम्मान करना राजनीतिक रूप से अनिवार्य हो गया। इसने संघवाद को मजबूत किया।
भारत में विकेंद्रीकरण (Decentralization in India)
जब केंद्र और राज्य सरकारों से शक्ति लेकर स्थानीय सरकारों (Local Self-Government) को दी जाती है, तो इसे विकेंद्रीकरण कहते हैं।
क) विकेंद्रीकरण की आवश्यकता
स्थानीय स्तर पर लोगों को समस्याओं और उनके समाधान की बेहतर जानकारी होती है। स्थानीय लोग निर्णय प्रक्रिया में सीधे भाग ले सकते हैं।
ख) 1992 का संवैधानिक संशोधन (Major Step towards Decentralization)
1992 में एक बड़ा कदम उठाया गया जिसने स्थानीय स्वशासन को मजबूत किया:
- अनिवार्य चुनाव: स्थानीय निकायों के चुनाव नियमित रूप से कराना संवैधानिक रूप से अनिवार्य कर दिया गया।
- आरक्षण: अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, और अन्य पिछड़ी जातियों के लिए सीटों का आरक्षण किया गया।
- महिला आरक्षण: कम से कम एक-तिहाई (1/3) पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए।
- राज्य चुनाव आयोग: पंचायती और नगरपालिका चुनाव कराने के लिए प्रत्येक राज्य में राज्य चुनाव आयोग का गठन किया गया।
- संसाधनों का बँटवारा: राज्य सरकारों के लिए स्थानीय सरकारों के साथ कुछ राजस्व और शक्तियाँ साझा करना अनिवार्य कर दिया गया।
ग) स्थानीय निकायों का ढाँचा
- ग्रामीण स्तर (पंचायती राज): ग्राम पंचायत, पंचायत समिति (ब्लॉक/मंडल स्तर), जिला परिषद।
- शहरी स्तर: नगरपालिकाएँ (छोटे शहर) और नगर निगम (बड़े शहर)।
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