पाठ – 3
समकालीन दक्षिण एशिया
In this post we have given the detailed notes of Class 12 Political Science Chapter 3 समकालीन दक्षिण एशिया (Contemporary South Asia) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 12 exams.
इस पोस्ट में कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के पाठ 3 समकालीन दक्षिण एशिया (Contemporary South Asia) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 12 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT |
| Class | Class 12 |
| Subject | Political Science |
| Chapter no. | Chapter 3 |
| Chapter Name | समकालीन दक्षिण एशिया (Contemporary South Asia) |
| Category | Class 12 Political Science Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
समकालीन दक्षिण एशिया (Contemporary South Asia)
दक्षिण एशिया विश्व का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो विभिन्न राजनीतिक प्रवृत्तियों, संघर्षों और सहयोग की संभावनाओं का केंद्र रहा है। बीसवीं सदी के अंत में भारत और पाकिस्तान के परमाणु शक्ति बनने के बाद यह क्षेत्र विश्व की नज़र में और भी महत्वपूर्ण हो गया।
दक्षिण एशिया का परिचय
|
विशेषताएँ |
विवरण |
|---|---|
|
भौगोलिक विशिष्टता |
उत्तर में विशाल हिमालय, दक्षिण में हिन्द महासागर, पश्चिम में अरब सागर, और पूर्व में बंगाल की खाड़ी इसे एक विशिष्ट क्षेत्रीय इकाई बनाते हैं। |
|
सदस्य देश |
भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और मालदीव (पारंपरिक रूप से मुख्य सात)। अफगानिस्तान को भी अब अक्सर इसमें शामिल किया जाता है। |
|
राजनीतिक प्रवृत्ति |
यह क्षेत्र लोकतंत्र, राजतंत्र और सैन्य शासन के मिले-जुले अनुभवों को साझा करता है। हालाँकि, अधिकांश देशों में लोकतंत्र को ही प्राथमिकता दी गई है। |
दक्षिण एशिया के देशों में लोकतंत्र
इस क्षेत्र के देशों में लोकतंत्र की राह हमेशा एक समान नहीं रही है, बल्कि इसमें सैन्य शासन, राजतंत्र और जातीय संघर्ष जैसी बाधाएँ रही हैं।
A. पाकिस्तान में सेना और लोकतंत्र
पाकिस्तान में लोकतंत्र और सैन्य शासन के बीच हमेशा संघर्ष रहा है।
-
अस्थिर लोकतंत्र: 1947 में आज़ादी के बाद, पाकिस्तान में लोकतंत्र स्थायी नहीं हो पाया। जनरल अयूब खान, जनरल याह्या खान, जनरल ज़िया-उल-हक और जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने सैन्य तख्तापलट के ज़रिए सत्ता पर कब्ज़ा किया।
-
लोकतंत्र की बहाली: जुल्फिकार अली भुट्टो (1971-77) और बेनज़ीर भुट्टो के साथ-साथ नवाज शरीफ के नेतृत्व में कुछ लोकतांत्रिक अवधियाँ रहीं।
-
बाधाएँ:
-
सेना, धर्मगुरुओं और भू-स्वामियों का सामाजिक दबदबा।
-
भारत के साथ लगातार तनाव (संघर्ष), जिससे सेना का प्रभाव बढ़ जाता है।
-
लोकतांत्रिक शासन के कमज़ोर होने पर सेना हस्तक्षेप को न्यायसंगत ठहराती है।
-
B. बांग्लादेश में लोकतंत्र
-
उत्पत्ति: 1971 में पाकिस्तान से अलग होने के बाद बांग्लादेश (पूर्वी पाकिस्तान) ने अपना संविधान बनाया, जिसमें धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और लोकतंत्र के सिद्धांतों को अपनाया गया।
-
सैन्य हस्तक्षेप: शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या (1975) के बाद सैन्य शासन स्थापित हुआ।
-
लोकतंत्र की वापसी: 1990 में छात्र आंदोलन के बाद सैन्य शासक को सत्ता छोड़नी पड़ी। 1991 में बहुदलीय लोकतंत्र स्थापित हुआ। वर्तमान में आवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) प्रमुख राजनीतिक दल हैं।
C. नेपाल में राजतंत्र से लोकतंत्र
-
पृष्ठभूमि: नेपाल में लंबे समय तक संवैधानिक राजतंत्र रहा, जहाँ राजा के पास ही वास्तविक शक्ति थी।
-
लोकतंत्र समर्थक आंदोलन: 1990 में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के बाद राजा ने नए संविधान को स्वीकार किया।
-
माओवादी संघर्ष: 2000 के दशक में राजा और माओवादी विद्रोहियों के बीच त्रिकोणीय संघर्ष हुआ।
-
समाप्ति: 2006 में बड़े पैमाने पर लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों के बाद राजशाही को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया गया। 2008 में नेपाल एक लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया।
D. श्रीलंका में जातीय संघर्ष
-
सफल लोकतंत्र: श्रीलंका (1948 में स्वतंत्रता प्राप्त) ने आज़ादी के बाद से सफलतापूर्वक लोकतंत्र बनाए रखा है।
-
जातीय संघर्ष: यहाँ की राजनीति पर सिंहली (बौद्ध बहुसंख्यक) और तमिल (अल्पसंख्यक) समुदायों के बीच संघर्ष हावी रहा है।
-
माँग: सिंहली राष्ट्रवादियों ने तमिलों पर राजनीतिक अधिकार सीमित करने की कोशिश की।
-
LTTE का उदय: तमिलों के अधिकारों की रक्षा के लिए तमिल ईलम लिबरेशन टाइगर्स (LTTE) नामक एक उग्रवादी संगठन का उदय हुआ, जिसने अलग तमिल ईलम (राज्य) की माँग की।
-
-
संघर्ष का अंत: 2009 में श्रीलंकाई सेना द्वारा LTTE को हराए जाने के बाद संघर्ष समाप्त हुआ।
संघर्ष और सहयोग के क्षेत्र
A. भारत-पाकिस्तान संघर्ष
|
संघर्ष का मुद्दा |
विवरण |
|---|---|
|
कश्मीर समस्या |
1947-48, 1965 और 1971 के युद्धों का मुख्य कारण। यह आज भी दोनों देशों के बीच संबंधों का सबसे बड़ा अड़ंगा है। |
|
आतंकवाद |
भारत, पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद और घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप लगाता है। |
|
हथियारों की होड़ |
1998 में दोनों देशों द्वारा परमाणु हथियारों का परीक्षण, जिसने क्षेत्र में अस्थिरता और तनाव पैदा किया। |
|
सियाचिन ग्लेशियर |
दोनों देशों के बीच सैन्य नियंत्रण को लेकर विवादित क्षेत्र। |
B. भारत और अन्य पड़ोसी देशों के संबंध
|
देश |
सहयोग के बिंदु |
विवाद/तनाव के बिंदु |
|---|---|---|
|
बांग्लादेश |
आपदा प्रबंधन, आर्थिक संबंध, ‘लुक ईस्ट’ नीति में सहयोग। |
गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी जल बँटवारा, भारत में अवैध अप्रवास। |
|
नेपाल |
मुक्त सीमा (Open Border), व्यापार समझौते, सांस्कृतिक व धार्मिक संबंध। |
भारत विरोधी भावनाओं का समय-समय पर उभार, चीन का बढ़ता प्रभाव। |
|
श्रीलंका |
मुक्त व्यापार समझौता (FTA), आपदा और मानवीय सहायता। |
तमिल मुद्दा, भारतीय मछुआरों को लेकर विवाद। |
|
भूटान |
आर्थिक सहायता, पनबिजली परियोजनाओं में सहयोग, सुरक्षा और सीमा प्रबंधन। |
दोनों देशों के बीच सबसे घनिष्ठ और शांतिपूर्ण संबंध। |
क्षेत्रीय सहयोग: सार्क और साफ्टा
सार्क (SAARC – South Asian Association for Regional Cooperation)
-
स्थापना: 1985 (ढाका में)।
-
उद्देश्य: दक्षिण एशियाई देशों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देना, आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति सुनिश्चित करना।
-
बाधाएँ: संगठन की सबसे बड़ी बाधा भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव है, जिसके कारण सार्क के शिखर सम्मेलन अक्सर रद्द हो जाते हैं और महत्वपूर्ण निर्णयों पर सहमति नहीं बन पाती है।
साफ्टा (SAFTA – South Asian Free Trade Agreement)
-
उद्देश्य: सार्क देशों के बीच मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना, जिससे व्यापार पर लगे शुल्क (टैरिफ) कम हों और क्षेत्रीय व्यापार को गति मिले।
-
प्रभावी: 1 जनवरी 2006 से प्रभावी।
-
महत्व: यह क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन राजनीतिक अविश्वास और व्यापार के मार्ग में आने वाली अन्य बाधाओं के कारण इसका पूर्ण लाभ अभी तक नहीं मिल पाया है।
बाहरी शक्तियों की भूमिका
दक्षिण एशिया की राजनीति में दो बड़ी बाहरी शक्तियों का प्रभाव रहा है:
-
चीन: चीन का इस क्षेत्र में प्रभाव तेज़ी से बढ़ा है। यह पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल में बुनियादी ढाँचे (ports, roads, power projects) में भारी निवेश कर रहा है।
-
संयुक्त राज्य अमेरिका (USA): शीतयुद्ध के बाद से अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ बेहतर संबंध स्थापित किए हैं। यह क्षेत्र में लोकतंत्र को बढ़ावा देने, शांति और आतंकवाद से निपटने में एक महत्वपूर्ण हितधारक रहा है।
We hope that Class 12 Political Science Chapter 3 समकालीन दक्षिण एशिया (Contemporary South Asia) notes in Hindi helped you. If you have any query about class 12 Political Science Chapter 3 समकालीन दक्षिण एशिया (Contemporary South Asia) notes in Hindi or about any other notes of class 12 polity in Hindi, so you can comment below. We will reach you as soon as possible…