पाठ – 8
भारतीय राजनीति में नए बदलाव
In this post we have given the detailed notes of Class 12 Political Science Book 2 Chapter 8 भारतीय राजनीति में नए बदलाव (Recent Changes in Indian Politics) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 12 exams.
इस पोस्ट में कक्षा 12 राजनीति विज्ञान पुस्तक 2 के पाठ 8 भारतीय राजनीति में नए बदलाव (Recent Changes in Indian Politics) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 12 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT |
| Class | Class 12 |
| Subject | Political Science Book 2 |
| Chapter no. | Chapter 8 |
| Chapter Name | भारतीय राजनीति में नए बदलाव (Recent Changes in Indian Politics) |
| Category | Class 12 Political Science Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
भारतीय राजनीति में नए बदलाव (Recent Changes in Indian Politics)
1990 के दशक के महत्वपूर्ण बदलाव
1990 का दशक भारतीय राजनीति में एक बड़े परिवर्तन का काल रहा। इसने ‘कांग्रेस प्रणाली’ के प्रभुत्व की समाप्ति और एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत को चिह्नित किया।
a. प्रमुख बदलाव
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बदलाव |
विवरण |
|---|---|
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कांग्रेस प्रणाली का अंत |
1989 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी की हार हुई और एक-दलीय प्रभुत्व का युग समाप्त हो गया। |
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गठबंधन का युग |
राष्ट्रीय स्तर पर किसी एक पार्टी को बहुमत न मिलना और गठबंधन की राजनीति का उदय। |
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मंडल मुद्दा |
अन्य पिछड़ी जातियों (ओ.बी.सी.) के लिए आरक्षण लागू होने से सामाजिक और राजनीतिक चेतना बढ़ी। |
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नई आर्थिक नीति (एल.पी.जी.) |
1991 में उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) की शुरुआत। |
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राम जन्मभूमि आंदोलन |
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का उदय और हिंदुत्व की राजनीति का उभार। |
गठबंधन का युग (Era of Coalitions)
1989 के बाद भारतीय राजनीति में गठबंधन का दौर शुरू हुआ, जो 2014 तक जारी रहा।
a. गठबंधन की राजनीति का उदय
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कमजोर बहुमत: किसी भी एक दल को बहुमत नहीं मिला।
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क्षेत्रीय दलों की भूमिका: छोटे क्षेत्रीय दलों ने केंद्र सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभानी शुरू कर दी।
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राजनीतिक अस्थिरता: अस्थिर सरकारों का बनना और बार-बार चुनाव होना (जैसे 1989, 1991, 1996, 1998, 1999)।
b. प्रमुख गठबंधन सरकारें (1989-2014)
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राष्ट्रीय मोर्चा (1989): कांग्रेस की हार के बाद वी.पी. सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय मोर्चा सरकार बनी, जिसे भाजपा और वाम मोर्चा (Left Front) ने बाहर से समर्थन दिया।
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संयुक्त मोर्चा (1996-1998): इस अवधि में दो अलग-अलग सरकारें बनीं (एच.डी. देवगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल), जिन्हें कांग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया।
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राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA – 1998/1999): अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा का सफल गठबंधन।
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संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA – 2004/2009): मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस का सफल गठबंधन।
मंडल मुद्दा और अन्य पिछड़ी जातियाँ (O.B.C.)
1990 के दशक में भारतीय राजनीति को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करना था।
a. मंडल आयोग
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गठन: 1978 में जनता पार्टी सरकार द्वारा बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल (B.P. Mandal) की अध्यक्षता में ‘द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग’ का गठन किया गया।
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सिफारिश (1980): आयोग ने सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ी जातियों (OBCs) के लिए 27% आरक्षण की सिफारिश की।
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सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन: OBCs में उन जातियों को शामिल किया गया जो शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़ी हुई थीं।
b. मंडल सिफारिशों का लागू होना
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घोषणा (1990): वी.पी. सिंह की राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की घोषणा की।
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विरोध और समर्थन: इस निर्णय से देश भर में आरक्षण के समर्थकों (OBCs) और आरक्षण के विरोधियों (सामान्य वर्ग) के बीच तीखे संघर्ष हुए। इसने जातिगत राजनीति को केंद्र में ला दिया।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: 1992 में, सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार मामले में मंडल आयोग की सिफारिशों को वैध ठहराया, लेकिन इसमें ‘क्रीमी लेयर’ (Creamy Layer) के सिद्धांत को लागू किया।
हिंदुत्व और धर्मनिरपेक्षता
1980 के दशक के अंत में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उदय के साथ हिंदुत्व की राजनीति ने केंद्र में जगह बनाई।
a. भाजपा का उदय
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पृष्ठभूमि: 1980 में जनसंघ के स्थान पर भाजपा का गठन हुआ।
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शुरुआत: भाजपा ने 1984 के चुनावों में केवल 2 सीटें जीती थीं।
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बदलाव: 1986 के बाद, भाजपा ने अपनी विचारधारा में हिंदुत्व के तत्वों को प्राथमिकता दी और अपने जनाधार का विस्तार किया।
b. अयोध्या विवाद (राम जन्मभूमि आंदोलन)
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विवाद: यह विवाद अयोध्या में बाबरी मस्जिद (जिसे मीर बाकी ने 16वीं सदी में बनवाया था) और राम मंदिर के स्थान से जुड़ा था। भाजपा ने इसे ‘हिंदुओं की भावनाओं का विषय’ बनाया।
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रथ यात्रा: लालकृष्ण आडवाणी ने 1990 में गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक राम रथ यात्रा निकाली, जिसने पूरे देश में राजनीतिक और धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दिया।
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विध्वंस: 6 दिसंबर 1992 को, अयोध्या में बाबरी मस्जिद का ढाँचा गिरा दिया गया। इस घटना के परिणामस्वरूप देश भर में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे।
c. धर्मनिरपेक्षता पर बहस
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अयोध्या की घटना ने भारत में धर्मनिरपेक्षता की प्रकृति पर गंभीर बहस छेड़ दी।
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एक ओर वे थे जो धार्मिक राष्ट्रवाद (जैसे हिंदुत्व) को लोकतंत्र के लिए खतरा मानते थे।
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दूसरी ओर, भाजपा और उसके समर्थक थे, जो धर्मनिरपेक्षता की पश्चिमी अवधारणा को नकारते हुए इसे ‘छद्म-धर्मनिरपेक्षता’ (Pseudo-secularism) बताते थे।
आर्थिक नीति में बदलाव: एल.पी.जी. (1991)
1991 में, पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के मार्गदर्शन में दूरगामी आर्थिक सुधारों की शुरुआत की।
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नीति |
विवरण |
|---|---|
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उदारीकरण (Liberalisation) |
अर्थव्यवस्था पर सरकारी नियंत्रणों को कम करना। |
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निजीकरण (Privatisation) |
सरकारी कंपनियों को निजी हाथों में बेचना या उनकी हिस्सेदारी कम करना। |
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वैश्वीकरण (Globalisation) |
भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ना। |
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परिणाम: इन सुधारों ने अर्थव्यवस्था की गति को बढ़ाया, लेकिन ‘गरीबी और विकास’ के बीच असमानता को भी जन्म दिया। 1990 के बाद से, विभिन्न राजनीतिक दल इन आर्थिक सुधारों को एक सीमा तक जारी रखने पर सहमत रहे हैं।
2004 के बाद की भारतीय राजनीति
2004 के चुनावों से भारतीय राजनीति में गठबंधन के युग का स्थिरीकरण हुआ।
a. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) बनाम संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA)
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2004 चुनाव: भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए सरकार बनाने में विफल रहा, और कांग्रेस के नेतृत्व में UPA (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) का गठन हुआ।
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2009 चुनाव: यूपीए गठबंधन फिर से सत्ता में आया।
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2014 और 2019 चुनाव: नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने अकेले दम पर पूर्ण बहुमत प्राप्त किया और एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने सत्ता संभाली।
b. नए सर्वसम्मति के बिंदु (New Consensus)
1990 के बाद के राजनीतिक संघर्षों के बावजूद, प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कई मुद्दों पर एक तरह की आम सहमति (Consensus) उभरकर सामने आई है:
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नई आर्थिक नीति पर सहमति: अधिकांश दल उदारीकरण और निजीकरण की नीतियों को जारी रखने पर सहमत हैं।
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अन्य पिछड़ी जातियों की स्वीकृति: सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों की राजनीतिक और सामाजिक दावेदारी को स्वीकार किया गया है।
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राज्यों की भूमिका पर सहमति: केंद्र में गठबंधन सरकारें होने के कारण राज्यों और क्षेत्रीय दलों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
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लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास: सभी राजनीतिक दल लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास बनाए रखते हैं, और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा चुनाव के माध्यम से होती है।
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