पाठ – 1
संविधान – क्यों और कैसे?
In this post we have given the detailed notes of Class 11 Political Science Book 2 Chapter 1 संविधान – क्यों और कैसे? (Constitution: Why and How?) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 11 exams.
इस पोस्ट में कक्षा 11 राजनीति विज्ञान पुस्तक 2 के पाठ 1 संविधान – क्यों और कैसे? (Constitution: Why and How?) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 11 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT |
| Class | Class 11 |
| Subject | Political Science Book 2 |
| Chapter no. | Chapter 1 |
| Chapter Name | संविधान – क्यों और कैसे? (Constitution: Why and How?) |
| Category | Class 11 Political Science Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
परिचय: हमें संविधान की क्या आवश्यकता है?
संविधान (Constitution) केवल नियमों की एक किताब नहीं है; यह किसी भी समाज और राज्य के सुचारू संचालन के लिए अनिवार्य है। यह तालमेल बिठाता है और सरकार की शक्तियों को तय करता है।
संविधान के कार्य (Functions of the Constitution)
संविधान समाज में निम्नलिखित 5 महत्वपूर्ण कार्य करता है:
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कार्य संख्या |
विवरण |
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पहला काम |
तालमेल और भरोसा: यह बुनियादी नियमों का एक ऐसा समूह उपलब्ध कराता है जिससे समाज के सदस्यों में न्यूनतम समन्वय और विश्वास बना रहे। |
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दूसरा काम |
निर्णय लेने की शक्ति: यह तय करता है कि समाज में निर्णय लेने की शक्ति किसके पास होगी। यह बताता है कि सरकार कैसे गठित होगी (जैसे- भारत में संसद कानून बनाती है)। |
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तीसरा काम |
सरकार की शक्तियों पर सीमाएँ: यह सरकार द्वारा नागरिकों पर लागू किए जाने वाले कानूनों पर सीमाएँ लगाता है। ये सीमाएँ मौलिक होती हैं (जैसे- मौलिक अधिकार) जिन्हें सरकार कभी उल्लंघन नहीं कर सकती। |
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चौथा काम |
आकांक्षाएँ और लक्ष्य: यह सरकार को ऐसी क्षमता प्रदान करता है जिससे वह जनता की आकांक्षाओं को पूरा कर सके और एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना कर सके (जैसे- जातिगत भेदभाव मिटाना)। |
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पाँचवाँ काम |
राष्ट्र की बुनियादी पहचान: यह लोगों को एक राजनीतिक और नैतिक पहचान देता है। इसके माध्यम से समाज एक सामूहिक इकाई बनता है। |
संविधान की सत्ता (The Authority of a Constitution)
सभी देशों के संविधान सफल नहीं होते। भारत, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका के संविधान सफल उदाहरण हैं। एक संविधान को प्रभावी बनाने वाले कारक निम्नलिखित हैं:
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प्रचलन में लाने का तरीका:
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सफल संविधान वे होते हैं जिन्हें लोकप्रिय नेताओं और राष्ट्रीय आंदोलनों के बाद बनाया गया हो।
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भारतीय संविधान को संविधान सभा ने बनाया, जिसे समाज के सभी वर्गों का सम्मान और विश्वास प्राप्त था।
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मौलिक प्रावधान:
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एक सफल संविधान बहुसंख्यकों को अल्पसंख्यकों को दबाने की अनुमति नहीं देता।
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यह सभी को संविधान का पालन करने का एक कारण देता है (स्वतंत्रता और समानता की सुरक्षा)।
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संस्थाओं की संतुलित रूपरेखा:
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संविधान शक्तियों को किसी एक संस्था (जैसे सेना या राजा) के पास एकाधिकार नहीं होने देता।
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भारत में शक्ति को विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और स्वतंत्र निकायों (जैसे चुनाव आयोग) में बांटा गया है। इसे ‘अवरोध और संतुलन’ (Check and Balance) का सिद्धांत कहते हैं।
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संविधान में लचीलापन और कठोरता का संतुलन होना चाहिए ताकि वह समय के साथ बदल सके लेकिन बुनियादी मूल्यों को न खोए।
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भारतीय संविधान कैसे बना? (Making of the Indian Constitution)
भारतीय संविधान को संविधान सभा द्वारा बनाया गया था।
संविधान सभा का गठन:
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समय: पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई। विभाजन के बाद 14 अगस्त 1947 को पुनः बैठक हुई।
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योजना: ‘कैबिनेट मिशन’ (1946) की योजना के अनुसार गठन हुआ।
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सदस्य संख्या:
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कुल सदस्य (अविभाजित भारत): 389
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विभाजन के बाद (भारत): 299 सदस्य रह गए।
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अंतिम रूप से हस्ताक्षर करने वाले (26 नवंबर 1949): 284 सदस्य।
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चुनाव: सदस्य 1935 की प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष विधि से चुने गए थे।
कामकाज की शैली:
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उद्देश्य प्रस्ताव (Objective Resolution): 1946 में जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसने संविधान के उद्देश्यों (लोकतंत्र, संप्रभुता, समानता, स्वतंत्रता) को परिभाषित किया।
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विचार-विमर्श: संविधान सभा केवल एक समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं कर रही थी, बल्कि व्यापक राष्ट्रीय हित में चर्चा कर रही थी।
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सार्वभौमिक मताधिकार: यह एक ऐसा प्रावधान था जो बिना किसी वाद-विवाद के पारित हो गया।
राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत
संविधान सभा ने उन मूल्यों को मूर्त रूप दिया जो राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान उभरे थे।
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सरकार का स्वरूप कैसा हो?
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किन असमानताओं को दूर किया जाए?
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नेहरू का ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ इसी विरासत का सारांश था।
विभिन्न देशों से लिए गए प्रावधान (Borrowed Provisions)
भारतीय संविधान निर्माताओं ने विश्व के अन्य संविधानों से सर्वोत्तम चीजें ग्रहण करने में संकोच नहीं किया। इसे “उधार का थैला” कहना गलत है, क्योंकि इसे भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल ढाला गया था।
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देश का संविधान |
लिए गए प्रावधान |
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ब्रिटिश संविधान |
1. सर्वाधिक मत के आधार पर चुनाव में जीत का फैसला (First Past the Post) 2. सरकार का संसदीय स्वरूप 3. कानून के शासन का विचार 4. विधायिका में अध्यक्ष का पद और भूमिका |
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अमेरिका का संविधान |
1. मौलिक अधिकारों की सूची 2. न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति और न्यायपालिका की स्वतंत्रता |
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आयरलैंड का संविधान |
राज्य के नीति-निर्देशक तत्व (DPSP) |
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फ्रांस का संविधान |
स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का सिद्धांत |
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कनाडा का संविधान |
एक अर्द्ध-संघात्मक सरकार का स्वरूप (सशक्त केंद्रीय सरकार वाली संघीय व्यवस्था) |
महत्वपूर्ण शब्दावली:
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संविधान सभा (Constituent Assembly): वह सभा जिसे संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए चुना गया था।
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उद्देश्य प्रस्ताव (Objective Resolution): नेहरू द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव जिसने संविधान के मार्गदर्शक सिद्धांतों को निर्धारित किया।
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नीति-निर्देशक तत्व (Directive Principles): वे निर्देश जो सरकार को सामाजिक और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए दिए गए हैं।
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