पाठ – 3
जल संसाधन
In this post we have given the detailed notes of class 10 SST (Geography) Chapter 3 जल संसाधन (Water Resources) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 10 exams.
इस पोस्ट में कक्षा 10 के सामाजिक विज्ञान (भूगोल) के पाठ 3 जल संसाधन (Water Resources) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 10 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT |
| Class | Class 10 |
| Subject | SST (Geography) |
| Chapter no. | Chapter 3 |
| Chapter Name | जल संसाधन (Water Resources) |
| Category | Class 10 SST (Geography) Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
परिचय: जल के कुछ तथ्य
- पृथ्वी का तीन-चौथाई धरातल जल से ढका हुआ है, लेकिन इसमें प्रयोग में लाने योग्य अलवणीय जल (मीठा पानी) का अनुपात बहुत कम है।
- यह अलवणीय जल हमें सतही अपवाह और भौमजल (Groundwater) से प्राप्त होता है, जिसका जलीय चक्र द्वारा लगातार नवीकरण होता रहता है।
- भविष्यवाणी: 2025 तक विश्व के अनेक देश जल की नितांत कमी महसूस करेंगे।
जल दुर्लभता और इसके कारण
जल दुर्लभता का अर्थ है जल की कमी। यह केवल कम वर्षा वाले क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अत्यधिक प्रयोग और असमान वितरण के कारण प्रचुर जल वाले क्षेत्रों में भी हो सकती है।
जल दुर्लभता के प्रमुख कारण:
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कारण |
विवरण |
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अति-शोषण और अत्यधिक प्रयोग |
बढ़ती जनसंख्या की घरेलू ज़रूरतों और अधिक अनाज उगाने के लिए सिंचाई हेतु जल संसाधनों का अत्यधिक शोषण हो रहा है। |
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उद्योगों का बढ़ता दबाव |
स्वतंत्रता के बाद हुए औद्योगीकरण के कारण उद्योगों में अलवणीय जल का प्रयोग बढ़ा है। साथ ही, उद्योगों को चलाने के लिए आवश्यक ऊर्जा का बड़ा हिस्सा जल विद्युत से आता है। |
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शहरीकरण |
शहरी जीवनशैली के कारण जल और ऊर्जा की आवश्यकता बढ़ी है। शहरों में जल संसाधनों का अति-शोषण हो रहा है, जिससे भौमजल स्तर नीचे गिर रहा है। |
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जल का असमान वितरण |
समाज के विभिन्न वर्गों में जल का असमान वितरण भी जल दुर्लभता का एक प्रमुख कारण है। |
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जल प्रदूषण |
घरेलू और औद्योगिक अपशिष्टों, रसायनों, कीटनाशकों और उर्वरकों के कारण जल की गुणवत्ता में गिरावट आई है, जिससे उपलब्ध जल भी मानव उपयोग के लिए खतरनाक हो गया है। |
बहु-उद्देशीय नदी परियोजनाएँ (बाँध)
नदियों पर बाँध बनाकर जल संरक्षण और प्रबंधन के प्रयास प्राचीन काल से होते आ रहे हैं। आधुनिक भारत में इन बाँधों को बहु-उद्देशीय परियोजनाएँ कहा जाता है।
- उद्देश्य: सिंचाई, विद्युत उत्पादन, घरेलू और औद्योगिक उपयोग, जलापूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन, आंतरिक नौचालन और मछली पालन।
- उदाहरण:
- भाखड़ा-नांगल परियोजना (सतलुज-ब्यास बेसिन): जल विद्युत उत्पादन और सिंचाई।
- हीराकुड परियोजना (महानदी बेसिन): जल संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण।
- जवाहरलाल नेहरू ने बाँधों को “आधुनिक भारत के मंदिर” कहा था।
बहु-उद्देशीय परियोजनाओं से हानियाँ और विवाद
- नदियों के प्राकृतिक बहाव पर प्रभाव: बाँध नदियों के प्राकृतिक बहाव को अवरुद्ध करते हैं, जिससे तलछट का बहाव कम हो जाता है और जलीय जीवों के आवास पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
- विस्थापन: बाँध बनाने से बड़े पैमाने पर स्थानीय समुदायों का विस्थापन होता है, जिससे उनकी आजीविका छिन जाती है।
- बाढ़ का कारण: जलाशयों में तलछट जमा होने से वे बाढ़ नियंत्रण में असफल हो सकते हैं।
- पारिस्थितिकीय समस्याएँ: अत्यधिक सिंचाई से मृदा में लवणीकरण (Salinization) हो सकता है।
- अंतर-राज्यीय जल विवाद: नदियों पर बाँध बनाने से राज्यों के बीच जल बँटवारे को लेकर विवाद उत्पन्न होते हैं, जैसे कृष्णा-गोदावरी विवाद।
वर्षा जल संग्रहण (Rainwater Harvesting)
यह बहु-उद्देशीय परियोजनाओं का एक सामाजिक-आर्थिक और पारिस्थितिक रूप से व्यावहारिक विकल्प है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रहण की पारंपरिक पद्धतियाँ प्रचलित हैं।
वर्षा जल संग्रहण की पारंपरिक विधियाँ:
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क्षेत्र |
विधि का नाम |
विवरण |
|---|---|---|
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पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्र |
‘गुल’ अथवा ‘कुल’ |
ये नदी की धारा का रास्ता बदलकर खेतों में सिंचाई के लिए बनाई गई वाहिकाएँ (Channels) हैं। |
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राजस्थान |
छत वर्षा जल संग्रहण |
पीने का पानी एकत्रित करने के लिए घरों की छतों से पाइप द्वारा भूमिगत ‘टाँका’ में जल संग्रहीत किया जाता है। इसे ‘पालर पानी’ भी कहते हैं। |
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बाढ़ के मैदान (पश्चिम बंगाल) |
बाढ़ जल वाहिकाएँ |
खेतों की सिंचाई के लिए बाढ़ के जल को वाहिकाओं द्वारा ले जाया जाता है। |
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शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्र |
‘खादीन’ (जैसलमेर) और ‘जोहड़’ |
खेतों में वर्षा जल एकत्रित करने के लिए बनाए गए गड्ढे। |
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मेघालय |
बाँस ड्रिप सिंचाई प्रणाली |
नदियों व झरनों के जल को बाँस से बने पाइप द्वारा खेतों तक पहुँचाया जाता है। |
आधुनिक काल में वर्षा जल संग्रहण: आज भी कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में यह तरीका प्रयोग में लाया जा रहा है।
- गंडाथूर (कर्नाटक): यह गाँव “वर्षा जल संपन्न गाँव” के रूप में प्रसिद्ध है, जहाँ लगभग 200 घरों में छत वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था है।
- तमिलनाडु: यह भारत का पहला राज्य है जहाँ सभी घरों के लिए छत वर्षा जल संग्रहण ढाँचा बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।
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