पाठ – 6
नागरिकता
In this post we have given the detailed notes of Class 11 Political Science Book 1 Chapter 6 नागरिकता (Citizenship) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 11 exams.
इस पोस्ट में कक्षा 11 राजनीति विज्ञान पुस्तक 1 के पाठ 6 नागरिकता (Citizenship) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 11 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT |
| Class | Class 11 |
| Subject | Political Science Book 1 |
| Chapter no. | Chapter 6 |
| Chapter Name | नागरिकता (Citizenship) |
| Category | Class 11 Political Science Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
परिचय: नागरिकता क्या है? (What is Citizenship?)
नागरिकता को किसी राजनीतिक समुदाय (देश/राष्ट्र) की पूर्ण और समान सदस्यता (Full and Equal Membership) के रूप में परिभाषित किया जाता है।
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राजनीतिक पहचान: नागरिकता हमें एक सामूहिक पहचान देती है (जैसे- हम भारतीय, जापानी या जर्मन हैं)।
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अधिकार और सुरक्षा: नागरिक अपने राष्ट्र से कुछ बुनियादी अधिकारों और यात्रा के दौरान सुरक्षा की अपेक्षा रखते हैं।
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महत्व: जिन लोगों के पास किसी भी देश की नागरिकता नहीं होती (शरणार्थी या अवैध प्रवासी), वे अधिकारों से वंचित रहते हैं और उनका जीवन असुरक्षित होता है।
संपूर्ण और समान सदस्यता (Full and Equal Membership)
इसका अर्थ है कि नागरिकों को देश में कहीं भी रहने, पढ़ने या काम करने का अधिकार मिलना चाहिए।
प्रमुख मुद्दे और विवाद:
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प्रवासन (Migration): लोग बेहतर रोजगार के लिए एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र (जैसे बिहार से मुंबई या बैंगलोर) जाते हैं।
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स्थानीय विरोध: अक्सर स्थानीय लोग “बाहरी” लोगों का विरोध करते हैं, यह मानते हुए कि वे उनके रोजगार और संसाधनों पर कब्जा कर रहे हैं (उदाहरण: “मुंबई मुंबईकरों के लिए” का नारा)।
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प्रश्न: क्या गमनागमन की आजादी का अर्थ देश के किसी भी हिस्से में बसने का अधिकार है? भारतीय संविधान के अनुसार, सभी नागरिकों को देश के किसी भी भाग में रहने और काम करने का अधिकार है।
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समान अधिकार (शहरी गरीब):
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शहरों में झोपड़पट्टी (Slum) वाले लोग सफाई, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहते हैं, जबकि वे शहर की अर्थव्यवस्था (सफाईकर्मी, फेरीवाले, घरेलू नौकर) के लिए जरूरी हैं।
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ओल्गा टेलिस बनाम बंबई नगर निगम (1985): सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि “जीने के अधिकार” में “आजीविका का अधिकार” भी शामिल है। फुटपाथवासियों को बेदखल करने से पहले उन्हें वैकल्पिक जगह दी जानी चाहिए।
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नागरिकता, समानता और अधिकार (टी. एच. मार्शल का विचार)
ब्रिटिश समाजशास्त्री टी. एच. मार्शल (T.H. Marshall) ने अपनी पुस्तक Citizenship and Social Class (1950) में नागरिकता को तीन प्रकार के अधिकारों से जोड़ा:
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अधिकारों का प्रकार |
विवरण |
उद्देश्य |
|---|---|---|
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नागरिक अधिकार (Civil Rights) |
व्यक्ति के जीवन, आजादी और संपत्ति की रक्षा। |
व्यक्तिगत स्वतंत्रता सुनिश्चित करना। |
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राजनीतिक अधिकार (Political Rights) |
शासन प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार (वोट देना, चुनाव लड़ना)। |
शक्ति में हिस्सेदारी। |
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सामाजिक अधिकार (Social Rights) |
शिक्षा, रोजगार और कल्याण का अधिकार। |
गरिमापूर्ण जीवन और समानता। |
नागरिक और राष्ट्र (Citizen and Nation)
आधुनिक काल में राष्ट्र-राज्य (Nation-State) की अवधारणा ने नागरिकता को परिभाषित किया।
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राष्ट्रीय पहचान: राष्ट्र अपनी पहचान झंडा, राष्ट्रगान, राष्ट्रभाषा या साझा इतिहास/संस्कृति के माध्यम से बनाते हैं।
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समावेशी बनाम बहिष्कृत:
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फ्रांस: यह समावेशी है। यह यूरोपीय मूल के साथ-साथ उत्तर अफ्रीकी नागरिकों को भी शामिल करता है। (हालांकि, सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक प्रतीकों जैसे पगड़ी या हिजाब पर रोक विवाद का विषय रही है)।
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इज़राइल/जर्मनी: यहाँ धर्म या जातीय मूल को नागरिकता में प्राथमिकता दी जाती है (जैसे जर्मनी में जर्मन मूल के लोगों को)।
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भारत: भारत एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक राष्ट्र है। यहाँ नागरिकता जन्म, वंश, पंजीकरण या देशीयकरण से मिलती है, न कि धर्म या जाति के आधार पर। संविधान विविधता (Diversity) को समायोजित करता है।
सार्वभौमिक नागरिकता और शरणार्थी (Universal Citizenship and Refugees)
अक्सर युद्ध, अकाल या उत्पीड़न के कारण लोग अपना देश छोड़ने को मजबूर होते हैं।
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राज्यविहीन लोग (Stateless People): यदि कोई देश उन्हें स्वीकार नहीं करता, तो वे ‘राज्यविहीन’ या शरणार्थी बन जाते हैं। (उदाहरण: म्यांमार के रोहिंग्या, मध्य-पूर्व के फिलिस्तीनी)।
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समस्या: उन्हें कोई अधिकार नहीं मिलते, वे अवैध रूप से शिविरों में रहते हैं, और अपने बच्चों को पढ़ा नहीं सकते।
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प्रश्न: क्या नागरिकता ही एकमात्र पहचान होनी चाहिए? क्या हमें विश्व नागरिकता की ओर बढ़ना चाहिए?
विश्व नागरिकता (Global Citizenship)
आज की दुनिया आपस में जुड़ी हुई (Interconnected) है। इंटरनेट, टीवी और संचार ने दुनिया को एक गाँव बना दिया है।
विश्व नागरिकता के तर्क:
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साझा समस्याएं: सुनामी, महामारी (जैसे बर्ड फ्लू/कोविड), और आतंकवाद जैसी समस्याएं किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। इनका समाधान केवल राष्ट्र-राज्य नहीं कर सकते, इसके लिए वैश्विक सहयोग (Global Cooperation) की जरूरत है।
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सहानुभूति: जब दुनिया के किसी हिस्से में आपदा आती है, तो हम जुड़ाव महसूस करते हैं और मदद करना चाहते हैं। यह ‘विश्व समाज’ के उभार का संकेत है।
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लाभ: यह राष्ट्रीय सीमाओं के पार समस्याओं (जैसे पर्यावरण सुरक्षा) को सुलझाने और शरणार्थियों को सुरक्षा देने में मदद कर सकती है।
निष्कर्ष: विश्व नागरिकता अभी एक वास्तविकता नहीं है, लेकिन यह हमें संकीर्ण राष्ट्रवाद से ऊपर उठकर पूरी मानवता के साथ रिश्ता जोड़ने के लिए प्रेरित करती है।
महत्वपूर्ण शब्दावली
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नागरिक (Citizen): वह व्यक्ति जिसे राज्य की पूर्ण सदस्यता और अधिकार प्राप्त हों।
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शरणार्थी (Refugee): वह व्यक्ति जो युद्ध या प्राकृतिक आपदा के कारण अपना देश छोड़ने को मजबूर हो गया हो और जिसे दूसरे देश में आश्रय मिला हो।
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प्रवासी (Migrant): वह व्यक्ति जो काम या रोजगार के लिए एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाता है।
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राष्ट्र-राज्य (Nation-State): एक ऐसा राज्य जिसकी एक निश्चित सीमा, जनसंख्या, सरकार और संप्रभुता हो, और जो अक्सर एक साझा संस्कृति पर आधारित हो।
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