पाठ – 7
राष्ट्रवाद
In this post we have given the detailed notes of Class 11 Political Science Book 1 Chapter 7 राष्ट्रवाद (Nationalism) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 11 exams.
इस पोस्ट में कक्षा 11 राजनीति विज्ञान पुस्तक 1 के पाठ 7 राष्ट्रवाद (Nationalism) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 11 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT |
| Class | Class 11 |
| Subject | Political Science Book 1 |
| Chapter no. | Chapter 7 |
| Chapter Name | राष्ट्रवाद (Nationalism) |
| Category | Class 11 Political Science Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
परिचय: राष्ट्रवाद क्या है? (Introduction)
राष्ट्रवाद (Nationalism) पिछली दो शताब्दियों में एक सम्मोहक राजनीतिक सिद्धांत के रूप में उभरा है।
-
आम समझ: लोग इसे देशभक्ति, राष्ट्रीय ध्वज और देश के लिए बलिदान से जोड़ते हैं। (जैसे- गणतंत्र दिवस की परेड भारतीय राष्ट्रवाद का प्रतीक है)।
-
दोहरा चरित्र: राष्ट्रवाद ने लोगों को जोड़ा भी है और विभाजित भी किया है।
-
इसने अत्याचारी शासनों और साम्राज्यों (जैसे ब्रिटिश, फ्रांसीसी साम्राज्य) से मुक्ति दिलाने में मदद की।
-
यह युद्धों, कटुता और संघर्षों (जैसे विश्व युद्ध) का कारण भी बना है।
-
ऐतिहासिक चरण:
-
19वीं सदी (यूरोप): कई छोटी रियासतों के एकीकरण से बड़े राष्ट्र-राज्य (जैसे जर्मनी, इटली) बने।
-
20वीं सदी (एशिया/अफ्रीका): औपनिवेशिक शासन से मुक्ति के संघर्ष।
-
वर्तमान: मौजूदा राष्ट्रों के भीतर भी अलगाववादी संघर्ष (जैसे कनाडा में क्यूबेक, स्पेन में बास्क, श्रीलंका में तमिल)।
राष्ट्र और राष्ट्रवाद (Nation and Nationalism)
राष्ट्र परिवार या जनजाति से अलग होता है। परिवार प्रत्यक्ष संबंधों पर आधारित होता है, जबकि राष्ट्र के सदस्य एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते।
-
काल्पनिक समुदाय: राष्ट्र एक ‘काल्पनिक समुदाय’ (Imagined Community) है जो अपने सदस्यों के सामूहिक विश्वास, आकांक्षाओं और कल्पनाओं के सहारे एक सूत्र में बंधा होता है।
राष्ट्र का निर्माण करने वाले कारक (Table)
|
कारक |
विवरण |
|---|---|
|
1. साझे विश्वास (Shared Beliefs) |
एक राष्ट्र का अस्तित्व तब तक है जब तक उसके सदस्य यह विश्वास करते हैं कि वे एक-दूसरे के साथ हैं (जैसे एक टीम)। |
|
2. इतिहास (History) |
राष्ट्र अपने लिए एक साझी ऐतिहासिक पहचान निर्मित करते हैं। वे साझे अतीत, स्मृतियों और किंवदंतियों के जरिए खुद को जोड़ते हैं (जैसे नेहरू की ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’)। |
|
3. भू-क्षेत्र (Territory) |
राष्ट्र की पहचान एक खास भौगोलिक क्षेत्र (मातृभूमि/पितृभूमि) से जुड़ी होती है। एक ही जमीन पर अलग-अलग समूहों का दावा संघर्ष का कारण बन सकता है (जैसे यहूदी और फिलिस्तीनी)। |
|
4. साझे राजनीतिक आदर्श (Shared Political Ideals) |
राष्ट्र के सदस्यों की राज्य के स्वरूप के बारे में एक साझी दृष्टि होती है। लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और उदारवाद जैसे मूल्यों को स्वीकार करना उन्हें राजनीतिक रूप से बांधता है। |
|
5. साझी राजनीतिक पहचान (Common Political Identity) |
लोकतंत्र में सांस्कृतिक (भाषा/धर्म) पहचान की जगह राजनीतिक पहचान महत्वपूर्ण होती है, ताकि विविधता को स्थान मिल सके। |
राष्ट्रीय आत्म-निर्णय (National Self-Determination)
राष्ट्र यह अधिकार मांगते हैं कि वे अपना शासन स्वयं चलाएं और अपने भविष्य का निर्धारण करें। इसे आत्म-निर्णय का अधिकार कहते हैं।
-
एक संस्कृति-एक राज्य (One Culture-One State): 19वीं सदी में यह मांग उठी कि एक संस्कृति वाले लोगों का अपना अलग राज्य होना चाहिए।
-
परिणाम: प्रथम विश्व युद्ध के बाद राज्यों का पुनर्गठन हुआ, लेकिन इससे बड़े पैमाने पर विस्थापन और हिंसा हुई क्योंकि किसी भी क्षेत्र में केवल एक ही नस्ल के लोग नहीं थे।
-
-
वर्तमान दुविधा: आज भी कई समूह (जैसे बास्क, कुर्द) पृथक राज्य की मांग कर रहे हैं। लेकिन हर समूह को स्वतंत्र राज्य देना असंभव और अवांछनीय है क्योंकि इससे बहुत छोटे और आर्थिक रूप से कमजोर राज्य बनेंगे।
राष्ट्रवाद और बहुलवाद (Nationalism and Pluralism)
दुनिया की समस्या का समाधान नए राज्य बनाने में नहीं, बल्कि मौजूदा राज्यों को अधिक लोकतांत्रिक और समावेशी बनाने में है।
-
समाधान: हमें ‘एक संस्कृति-एक राज्य’ के विचार को त्यागना होगा।
-
बहुलवाद: एक ही देश में विभिन्न संस्कृतियों और समुदायों को फलने-फूलने का मौका मिलना चाहिए।
-
अल्पसंख्यक अधिकार: भारतीय संविधान की तरह, भाषायी और धार्मिक अल्पसंख्यकों को संवैधानिक सुरक्षा दी जानी चाहिए। राष्ट्रीय पहचान को समावेशी होना चाहिए ताकि सभी समूह खुद को राष्ट्र का अंग मान सकें।
रवीन्द्रनाथ टैगोर की समालोचना (Tagore’s Critique of Nationalism)
रवीन्द्रनाथ टैगोर संकीर्ण राष्ट्रवाद और देशभक्ति के आलोचक थे।
-
उनका कथन: “देशभक्ति को मानवता पर विजयी नहीं होने दूंगा।” (Patriotism cannot be our final spiritual shelter; my refuge is humanity.)
-
वे मानते थे कि हमें पश्चिमी साम्राज्यवाद का विरोध करना चाहिए लेकिन पश्चिमी सभ्यता की अच्छी बातों को खारिज नहीं करना चाहिए।
-
संकीर्ण राष्ट्रवाद मानवता के विरुद्ध और आक्रामक हो सकता है।
We hope that Class 11 Political Science Book 1 Chapter 7 राष्ट्रवाद (Nationalism) notes in Hindi helped you. If you have any query about class 11 Political Science Book 1 Chapter 7 राष्ट्रवाद (Nationalism) notes in Hindi or about any other notes of class 11 polity in Hindi, so you can comment below. We will reach you as soon as possible…