धर्मनिरपेक्षता (CH-8) Notes in Hindi || Class 11 Political Science Book 1 Chapter 8 in Hindi ||

पाठ – 8

धर्मनिरपेक्षता

In this post we have given the detailed notes of Class 11 Political Science Book 1 Chapter 8 धर्मनिरपेक्षता (Secularism) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 11 exams.

इस पोस्ट में कक्षा 11 राजनीति विज्ञान पुस्तक 1 के पाठ 8 धर्मनिरपेक्षता (Secularism) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 11 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।

BoardCBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board
TextbookNCERT
ClassClass 11
SubjectPolitical Science Book 1
Chapter no.Chapter 8
Chapter Nameधर्मनिरपेक्षता (Secularism)
CategoryClass 11 Political Science Notes in Hindi
MediumHindi
Class 11 Political Science Book 1 Chapter 8 धर्मनिरपेक्षता (Secularism) in Hindi

धर्मनिरपेक्षता क्या है? (What is Secularism?)

धर्मनिरपेक्षता केवल धर्म और राज्य के बीच अलगाव नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक वर्चस्व (Religious Domination) का विरोध करना है। यह वर्चस्व दो प्रकार का हो सकता है:

  1. अंतर-धार्मिक वर्चस्व (Inter-religious Domination): जब एक धार्मिक समुदाय दूसरे धार्मिक समुदायों का उत्पीड़न करता है।

    • उदाहरण: 1984 के सिख दंगे, कश्मीरी पंडितों का विस्थापन, 2002 के गुजरात दंगे।

  2. अंतःधार्मिक वर्चस्व (Intra-religious Domination): जब एक ही धर्म के भीतर कुछ लोग दूसरों का शोषण या भेदभाव करते हैं।

    • उदाहरण: दलितों को मंदिर में प्रवेश से रोकना, महिलाओं के साथ धार्मिक भेदभाव।

निष्कर्ष: धर्मनिरपेक्षता एक ऐसा सिद्धांत है जो अंतर-धार्मिक और अंतःधार्मिक, दोनों तरह के वर्चस्व का विरोध करता है और धार्मिक स्वतंत्रता व समानता को बढ़ावा देता है।

धर्मनिरपेक्ष राज्य (The Secular State)

धार्मिक भेदभाव को रोकने के लिए राज्य सत्ता का स्वरूप कैसा होना चाहिए?

  • धर्मतांत्रिक राज्य (Theocratic State): वह राज्य जिसका शासन सीधे पुरोहित वर्ग के हाथ में हो या जो किसी एक धर्म को राज्य का धर्म मानता हो (जैसे- मध्यकालीन यूरोप में पोप का शासन, पाकिस्तान का आधिकारिक धर्म इस्लाम है)। ऐसे राज्य में धार्मिक समानता नहीं हो सकती।

  • धर्मनिरपेक्ष राज्य: वह राज्य जो किसी खास धर्म को राजधर्म नहीं मानता और धार्मिक संस्थाओं से औपचारिक दूरी बनाए रखता है।

धर्मनिरपेक्षता के मॉडल: पश्चिमी बनाम भारतीय

(क) धर्मनिरपेक्षता का पश्चिमी मॉडल (Western Model)

  • पारस्परिक निषेध (Mutual Exclusion): धर्म और राज्य एक-दूसरे के मामलों में बिल्कुल दखल नहीं देते।

  • सिद्धांत: “दीवार का सिद्धांत” (Wall of Separation)। राज्य धर्म की मदद नहीं कर सकता और न ही उसमें सुधार कर सकता है।

  • व्यक्तिवादी: यह केवल व्यक्तियों के अधिकारों पर जोर देता है, समुदायों के अधिकारों पर नहीं।

  • उदाहरण: अमेरिका (USA)।

(ख) धर्मनिरपेक्षता का भारतीय मॉडल (Indian Model)

  • सैद्धांतिक दूरी (Principled Distance): भारतीय राज्य धर्म से अलग है, लेकिन जरूरत पड़ने पर उसमें हस्तक्षेप भी कर सकता है।

  • हस्तक्षेप क्यों? धार्मिक कुरीतियों को मिटाने के लिए। (जैसे- संविधान ने छुआछूत पर प्रतिबंध लगाया, तीन तलाक कानून)।

  • अल्पसंख्यक अधिकार: भारतीय धर्मनिरपेक्षता केवल व्यक्तियों की नहीं, बल्कि अल्पसंख्यक समुदायों की संस्कृति और शिक्षण संस्थान खोलने के अधिकारों की भी रक्षा करती है।

  • नेहरू के विचार: धर्मनिरपेक्षता का मतलब धर्म का विरोध नहीं, बल्कि “सभी धर्मों को समान संरक्षण” है।

तुलनात्मक तालिका: पश्चिमी बनाम भारतीय धर्मनिरपेक्षता

विशेषता

पश्चिमी (अमेरिकी) मॉडल

भारतीय मॉडल

संबंध

धर्म और राज्य का पूर्ण अलगाव (निषेध)।

धर्म और राज्य के बीच ‘सैद्धांतिक दूरी’।

हस्तक्षेप

राज्य धर्म के मामले में हस्तक्षेप नहीं करता।

राज्य सुधार के लिए हस्तक्षेप कर सकता है (जैसे छुआछूत का अंत)।

अधिकार

केवल व्यक्तियों के अधिकारों पर जोर।

व्यक्ति और धार्मिक समुदाय (अल्पसंख्यक) दोनों के अधिकारों की रक्षा।

फोकस

अंतर-धार्मिक समानता पर कम ध्यान।

अंतर-धार्मिक और अंतःधार्मिक दोनों समानताओं पर जोर।

कमाल अतातुर्क की धर्मनिरपेक्षता (तुर्की का उदाहरण)

तुर्की के नेता मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने प्रथम विश्व युद्ध के बाद एक अलग तरह की धर्मनिरपेक्षता अपनाई।

  • यह हस्तक्षेपकारी और दमनकारी थी।

  • उन्होंने पारंपरिक ‘फैज़’ टोपी पर प्रतिबंध लगाया, पश्चिमी कपड़े अनिवार्य किए और अरबी की जगह लैटिन लिपि लागू की।

  • यह भारतीय मॉडल से अलग है क्योंकि भारत में धर्मनिरपेक्षता का अर्थ धर्म का दमन नहीं, बल्कि स्वतंत्रता और समानता है।

भारतीय धर्मनिरपेक्षता की आलोचनाएँ (Criticisms)

भारतीय धर्मनिरपेक्षता पर अक्सर निम्नलिखित आरोप लगते हैं:

  1. धर्मविरोधी (Anti-religious):

    • जवाब: यह धर्मविरोधी नहीं, बल्कि वर्चस्व-विरोधी है। यह धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करती है।

  2. पश्चिम से आयातित (Western Import):

    • जवाब: यह पश्चिमी नकल नहीं है। भारतीय मॉडल ने अपनी विशिष्टता (जैसे अल्पसंख्यकों के अधिकार और सुधार के लिए हस्तक्षेप) विकसित की है जो भारत की विविधता के अनुकूल है।

  3. अल्पसंख्यकवाद (Minoritism): आरोप है कि यह अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण करती है।

    • जवाब: अल्पसंख्यकों के मौलिक हितों की रक्षा करना तुष्टीकरण नहीं, बल्कि न्याय है। जैसे ट्रेन में सिगरेट पीने वाले के मुकाबले अस्थमा के मरीज की बात मानना विशेष सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत है।

  4. वोट बैंक की राजनीति: राजनेता धर्म का इस्तेमाल वोट के लिए करते हैं।

    • जवाब: लोकतंत्र में नेता वोट मांगेंगे ही, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इससे वास्तव में उस समूह का भला हो रहा है या केवल भावनात्मक शोषण।

  5. असंभव परियोजना: यह माना जाता है कि अलग-अलग धर्मों के लोग साथ नहीं रह सकते।

    • जवाब: भारतीय इतिहास सह-अस्तित्व का प्रमाण है। भारतीय धर्मनिरपेक्षता भविष्य की दुनिया का प्रतिबिंब है।

महत्वपूर्ण शब्दावली

  • धर्मतंत्र (Theocracy): वह शासन जहाँ पुरोहित वर्ग ईश्वर के नाम पर शासन करता है।

  • सैद्धांतिक दूरी (Principled Distance): राज्य का धर्म से अलग होना, लेकिन संविधान के मूल्यों (समानता, न्याय) को बनाए रखने के लिए धर्म में हस्तक्षेप करने की शक्ति रखना।

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