पाठ – 2
भारतीय संविधान में अधिकार
In this post we have given the detailed notes of Class 11 Political Science Book 2 Chapter 2 भारतीय संविधान में अधिकार (Rights in the Indian Constitution) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 11 exams.
इस पोस्ट में कक्षा 11 राजनीति विज्ञान पुस्तक 2 के पाठ 2 भारतीय संविधान में अधिकार (Rights in the Indian Constitution) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 11 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT |
| Class | Class 11 |
| Subject | Political Science Book 2 |
| Chapter no. | Chapter 2 |
| Chapter Name | भारतीय संविधान में अधिकार (Rights in the Indian Constitution) |
| Category | Class 11 Political Science Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
अधिकारों का महत्व (Importance of Rights)
लोकतंत्र में अधिकारों का होना अनिवार्य है। ये सुनिश्चित करते हैं कि सरकार और अन्य व्यक्ति नागरिकों की स्वतंत्रता और गरिमा का हनन न करें।
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अधिकारों का घोषणापत्र (Bill of Rights): लोकतांत्रिक देशों में नागरिकों के अधिकारों को संविधान में सूचीबद्ध किया जाता है और उन्हें सुरक्षा दी जाती है। अधिकारों की इसी सूची को ‘अधिकारों का घोषणापत्र’ कहते हैं।
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उद्देश्य: यह सरकार को नागरिकों के अधिकारों के विरुद्ध काम करने से रोकता है और उल्लंघन होने पर उपचार (Remedy) सुनिश्चित करता है।
मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)
स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान (1928 में मोतीलाल नेहरू समिति द्वारा) अधिकारों की मांग उठाई गई थी। संविधान में कुछ अधिकारों को विशेष दर्जा दिया गया है, जिन्हें ‘मौलिक अधिकार’ कहते हैं।
मौलिक अधिकार बनाम सामान्य अधिकार
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विशेषता |
मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) |
सामान्य कानूनी अधिकार (Legal Rights) |
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सुरक्षा |
इनकी सुरक्षा और गारंटी स्वयं संविधान देता है। |
इनकी सुरक्षा साधारण कानूनों द्वारा होती है। |
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परिवर्तन |
इनमें बदलाव के लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता होती है। |
इनमें बदलाव संसद साधारण कानून बनाकर कर सकती है। |
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उल्लंघन |
सरकार का कोई अंग इनका उल्लंघन नहीं कर सकता। |
सरकार कानून बनाकर इन्हें बदल सकती है। |
न्यायपालिका की भूमिका: यदि सरकार के किसी कार्य से मौलिक अधिकारों का हनन होता है, तो न्यायपालिका (Supreme Court/High Court) उसे अवैध घोषित कर सकती है। हालांकि, ये अधिकार असीमित नहीं हैं; सरकार इन पर ‘औचित्यपूर्ण प्रतिबंध’ (Reasonable Restrictions) लगा सकती है।
भारतीय संविधान में 6 मौलिक अधिकार
(1) समता का अधिकार (Right to Equality)
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कानून के समक्ष समानता: कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा।
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भेदभाव का निषेध: धर्म, जाति, लिंग या जन्म-स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा (दुकानों, होटलों, कुओं आदि पर प्रवेश)।
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अवसर की समानता: सरकारी नौकरियों में सभी को समान अवसर मिलेंगे।
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छुआछूत का अंत: अस्पृश्यता (Untouchability) को अपराध घोषित किया गया है।
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उपाधियों का अंत: सेना और शिक्षा को छोड़कर राज्य कोई उपाधि नहीं देगा।
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आरक्षण (Article 16-4): समानता का अर्थ यह नहीं है कि पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान न किए जाएं। आरक्षण समानता के अधिकार का उल्लंघन नहीं, बल्कि उसे पूरा करने का माध्यम है।
(2) स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom)
स्वतंत्रता का अर्थ है बिना किसी अन्य की स्वतंत्रता को नुकसान पहुंचाए कार्य करना।
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व्यक्तिगत स्वतंत्रता: किसी भी व्यक्ति को कानून की प्रक्रिया के बिना उसके जीवन या स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता (Article 21 – जीवन और दैहिक स्वतंत्रता)।
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अन्य स्वतंत्रताएं: भाषण और अभिव्यक्ति, सभा करने, संगठन बनाने, घूमने-फिरने, बसने और पेशा चुनने की आजादी।
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अभियुक्तों के अधिकार:
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एक ही अपराध के लिए एक बार से ज्यादा सजा नहीं।
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खुद के खिलाफ गवाही देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
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निवारक नज़रबंदी (Preventive Detention): अगर सरकार को लगे कि कोई व्यक्ति देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है, तो उसे अपराध करने से पहले ही गिरफ्तार किया जा सकता है। इसे अधिकतम 3 महीने तक बढ़ाया जा सकता है (बिना सलाहकार बोर्ड की मंजूरी के)। इसकी अक्सर आलोचना की जाती है।
(3) शोषण के विरुद्ध अधिकार (Right against Exploitation)
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मानव व्यापार पर रोक: इंसानों की खरीद-फरोख्त और ‘बेगार’ (बिना पैसे के काम) या बंधुआ मजदूरी पर प्रतिबंध।
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बाल श्रम निषेध: 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कारखानों या खदानों जैसे खतरनाक कामों में नहीं लगाया जा सकता।
(4) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom of Religion)
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अंतःकरण की स्वतंत्रता: किसी भी धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की आजादी।
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भारत का अपना कोई ‘राजकीय धर्म’ नहीं है (धर्मनिरपेक्षता)।
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प्रतिबंध: लोक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर सरकार धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक लगा सकती है (जैसे सती प्रथा या मानव बलि पर रोक)।
(5) सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकार (Cultural and Educational Rights)
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भारत विविधताओं वाला देश है। अल्पसंख्यकों (भाषाई और धार्मिक) को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को सुरक्षित रखने का अधिकार है।
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अल्पसंख्यकों को अपने शिक्षण संस्थान खोलने और चलाने का अधिकार है।
(6) संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Right to Constitutional Remedies)
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डॉ. अंबेडकर ने इसे “संविधान का हृदय और आत्मा” कहा है।
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यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो वह सीधे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) या उच्च न्यायालय जा सकता है।
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न्यायालय विशेष आदेश जारी करता है जिन्हें ‘रिट’ (Writs) कहते हैं:
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बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus): गिरफ्तार व्यक्ति को अदालत के सामने पेश करना।
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परमादेश (Mandamus): पदाधिकारी को कर्तव्य पालन का आदेश देना।
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निषेध आदेश (Prohibition): निचली अदालत को अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकना।
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अधिकार पृच्छा (Quo Warranto): किसी व्यक्ति से पूछना कि वह किस अधिकार से पद पर बैठा है।
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उत्प्रेषण (Certiorari): निचली अदालत से मामले को ऊपर की अदालत में मंगाना।
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राज्य के नीति-निर्देशक तत्व (Directive Principles of State Policy – DPSP)
संविधान निर्माताओं ने सामाजिक और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए कुछ निर्देश दिए हैं, जिन्हें नीति-निर्देशक तत्व कहते हैं।
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उद्देश्य: लोगों का कल्याण, समान वेतन, जीवन स्तर को ऊपर उठाना, संसाधनों का समान वितरण।
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प्रकृति: ये वाद-योग्य नहीं (Non-justiciable) हैं। यानी अगर सरकार इन्हें लागू न करे, तो हम अदालत नहीं जा सकते।
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उदाहरण: जमींदारी उन्मूलन, पंचायती राज, शिक्षा का अधिकार (RTE), मनरेगा।
मौलिक अधिकार और नीति-निर्देशक तत्वों में संबंध
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मौलिक अधिकार सरकार पर प्रतिबंध लगाते हैं (क्या नहीं करना है), जबकि नीति-निर्देशक तत्व सरकार को कुछ करने की प्रेरणा देते हैं।
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कभी-कभी दोनों में टकराव होता है (जैसे संपत्ति के अधिकार को लेकर)। 1973 के केशवानंद भारती मामले में न्यायालय ने कहा कि संसद संविधान के ‘मूल ढांचे’ को नहीं बदल सकती।
मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties)
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1976 में 42वें संशोधन द्वारा संविधान में नागरिकों के 10 (अब 11) मौलिक कर्तव्य जोड़े गए।
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उदाहरण: संविधान का पालन करना, देश की रक्षा करना, पर्यावरण की रक्षा करना, भाईचारा बढ़ाना।
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ये कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं, लेकिन नागरिकों से नैतिक अपेक्षाएं हैं।
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स्थापना: 1993 (कानून द्वारा)।
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कार्य: मानवाधिकारों के उल्लंघन (जैसे हिरासत में मौत, पुलिस ज्यादती) की शिकायतों की जाँच करना और सरकार/न्यायालय को सिफारिश करना।
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