वैश्वीकरण (CH-7) Notes in Hindi || Class 12 Political Science Chapter 7 in Hindi ||

पाठ – 7

वैश्वीकरण

In this post we have given the detailed notes of Class 12 Political Science Chapter 7 वैश्वीकरण (Globalisation) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 12 exams.

इस पोस्ट में कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के पाठ 7 वैश्वीकरण (Globalisation) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 12 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।

BoardCBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board
TextbookNCERT
ClassClass 12
SubjectPolitical Science
Chapter no.Chapter 7
Chapter Nameवैश्वीकरण (Globalisation)
CategoryClass 12 Political Science Notes in Hindi
MediumHindi
Class 12 Political Science Chapter 7 वैश्वीकरण (Globalisation) in Hindi

वैश्वीकरण (Globalisation)

वैश्वीकरण का अर्थ और अवधारणा

वैश्वीकरण एक बहुआयामी अवधारणा है। इसका मूल अर्थ दुनिया के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक प्रवाह (Flows) का निरंतर और तेज़ विस्तार है। यह प्रवाह विभिन्न चीज़ों का हो सकता है:

  1. पूँजी (Capital): धन का एक देश से दूसरे देश में निवेश के लिए जाना।

  2. वस्तुएँ (Goods): व्यापार के लिए वस्तुओं का आयात-निर्यात।

  3. विचार (Ideas): इंटरनेट, मीडिया और प्रौद्योगिकी के माध्यम से विचारों का तेज़ी से फैलना।

  4. लोग (People): शिक्षा, रोज़गार या पर्यटन के लिए लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना।

मूल तत्व: वैश्वीकरण दुनिया के अंतर्संबंधों और परस्पर निर्भरता को बढ़ाता है, जिससे भौगोलिक दूरियाँ कम हो जाती हैं।

वैश्वीकरण के कारण

वैश्वीकरण कोई एक घटना नहीं, बल्कि कई कारकों का परिणाम है।

A. प्रौद्योगिकी (Technology)

  • महत्व: यह वैश्वीकरण का सबसे महत्वपूर्ण कारण है।

  • संचार क्रांति: टेलीग्राफ, टेलीफोन, इंटरनेट, और कंप्यूटर जैसी प्रौद्योगिकी ने संचार को सस्ता और तेज़ बना दिया है।

  • परिवहन: परिवहन के साधनों (जैसे हवाई जहाज़ और कंटेनर शिपिंग) में सुधार ने वस्तुओं के आवागमन को आसान बना दिया है।

B. आर्थिक उदारीकरण और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ

  • शीत युद्ध की समाप्ति के बाद दुनिया में पूँजीवाद (Capitalism) के वर्चस्व ने वैश्वीकरण की राह खोली।

  • आईएमएफ (IMF), विश्व बैंक (World Bank), और विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसी अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संस्थाओं ने देशों को अपनी अर्थव्यवस्थाएँ खोलने और व्यापार पर प्रतिबंध कम करने के लिए प्रोत्साहित किया।

C. अंतर्संबंध (Interconnectedness)

  • आज कोई भी घटना (जैसे महामारी या आर्थिक संकट) किसी एक देश तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है। इस बढ़ते अंतर्संबंध ने भी वैश्वीकरण को गति दी है।

वैश्वीकरण के परिणाम

वैश्वीकरण के तीन मुख्य आयामों पर इसके दूरगामी परिणाम हुए हैं:

आयाम

सकारात्मक परिणाम (लाभ)

नकारात्मक परिणाम (हानि)

A. राजनीतिक परिणाम

सूचना के प्रवाह से राज्य की क्षमता (विशेषकर प्रौद्योगिकी और सूचना जुटाने में) में वृद्धि। लोकतंत्र का विस्तार।

कल्याणकारी राज्य की अवधारणा कमज़ोर हुई। राज्य केवल कानून और व्यवस्था तक सीमित होता गया। संप्रभुता पर अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं का प्रभाव।

B. आर्थिक परिणाम

विश्व व्यापार में वृद्धि, नए रोज़गार (विशेषकर सेवा क्षेत्र में)। गरीब देशों को निवेश और प्रौद्योगिकी मिली।

आर्थिक असमानता बढ़ी (अमीर और गरीब देशों तथा देशों के भीतर)। कुछ उद्योगों का बंद होना (बेरोज़गारी)। डब्ल्यूटीओ जैसे संगठनों का प्रभुत्व।

C. सांस्कृतिक परिणाम

सांस्कृतिक आदान-प्रदान से विविधता का प्रसार (जैसे योग, भारतीय मसाले)।

सांस्कृतिक समरूपता (Homogenisation) का खतरा – पश्चिमी संस्कृति का प्रभुत्व (जैसे “बर्गर और ब्लू जीन्स की संस्कृति”)। स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली पर नकारात्मक प्रभाव।

सांस्कृतिक समरूपता बनाम विषमता

  • समरूपता (Homogenisation): इसका अर्थ है कि पूरी दुनिया में एक ही संस्कृति का प्रभुत्व हो जाना। पश्चिमी संस्कृति (विशेषकर अमेरिकी संस्कृति) का प्रभाव बढ़ना इसका उदाहरण है।

  • विषमता (Heterogenisation): वैश्वीकरण से स्थानीय संस्कृतियाँ भी अपनी जड़ों को मज़बूत कर रही हैं। लोग बाहरी प्रभावों को अपनी ज़रूरतों के हिसाब से ढालते हैं। इसे संस्कृति का विविधीकरण (Cultural Heterogenisation) कहते हैं (जैसे: भारत में बर्गर का शाकाहारी/मसालेदार रूप मिलना)।

भारत और वैश्वीकरण

A. आर्थिक उदारीकरण (1991)

  • भारत ने 1991 के आर्थिक संकट के बाद नई आर्थिक नीति अपनाई।

  • एलपीजी मॉडल (LPG Model): Liberalisation (उदारीकरण), Privatisation (निजीकरण), Globalisation (वैश्वीकरण)।

  • भारत ने आयात पर लगे प्रतिबंध हटाए, विदेशी निवेश को आकर्षित किया, और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों (IMF, World Bank) के प्रति अपनी नीतियाँ बदलीं।

B. प्रभाव

  • सकारात्मक: उच्च आर्थिक विकास दर, सेवा क्षेत्र (विशेषकर आईटी उद्योग) में भारी वृद्धि, विदेशों में रोज़गार के अवसर, निर्यात में बढ़ोत्तरी।

  • नकारात्मक: कृषि क्षेत्र उपेक्षित रहा, कुछ छोटे उद्योग विदेशी प्रतिस्पर्धा के सामने बंद हो गए, रोज़गार के अवसर अस्थिर हुए।

वैश्वीकरण का प्रतिरोध

वैश्वीकरण के बढ़ते प्रभावों, विशेषकर राज्य के कमज़ोर होने और आर्थिक असमानता बढ़ने के कारण दुनिया भर में इसका विरोध हुआ है।

विश्व सामाजिक मंच (World Social Forum – WSF)

  • उद्देश्य: वैश्वीकरण के विरोध में कार्यरत कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पर्यावरणविदों और मज़दूर संगठनों को एक मंच पर लाना।

  • नारा: WSF का नारा है: “एक और दुनिया मुमकिन है” (Another World is Possible)

  • यह मंच नव-उदारवादी वैश्वीकरण की आलोचना करता है और वैकल्पिक वैश्विक व्यवस्था के लिए विचारों का आदान-प्रदान करता है।

  • पहली बैठक 2001 में पोर्टो एलेग्रे, ब्राज़ील में हुई थी।

भारत पर वैश्वीकरण का भविष्य

भारत वैश्वीकरण को प्रभावित भी कर रहा है। भारत की अर्थव्यवस्था और कुशल श्रम शक्ति वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक अनिवार्य हिस्सा बन गई है। यह दुनिया के लिए एक बड़ा बाज़ार भी है। वैश्वीकरण भारत के लिए एक चुनौती और एक अवसर दोनों है: यह इसकी अर्थव्यवस्था को तेज़ गति देता है, लेकिन साथ ही इसकी स्थानीय संस्कृति और सामाजिक न्याय के लिए खतरा भी पैदा करता है।

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