संविधान निर्माण (CH-2) Notes in Hindi || Class 9 SST Polity Chapter 2 in Hindi ||

पाठ – 2

संविधान निर्माण

In this post we have given the detailed notes of class 9 SST (Polity) Chapter 2 संविधान निर्माण (Constitutional Design) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 9 exams.

इस पोस्ट में कक्षा 9 के सामाजिक विज्ञान (इतिहास) के पाठ 2 संविधान निर्माण (Constitutional Design) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 9 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।

BoardCBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board
TextbookNCERT
ClassClass 9
SubjectSST (Polity)
Chapter no.Chapter 2
Chapter Nameसंविधान निर्माण (Constitutional Design)
CategoryClass 9 SST (Polity) Notes in Hindi
MediumHindi
Class 9 SST (Polity) Chapter 2 संविधान निर्माण (Constitutional Design) in Hindi

परिचय: संविधान क्या है?

  • परिभाषा
    • संविधान बुनियादी नियमों का एक लिखित समूह है, जिसका पालन नागरिकों और सरकार दोनों को करना होता है। यह देश का सर्वोच्च कानून होता है, जिसे वहाँ रहने वाले सभी लोग सामूहिक रूप से मानते हैं।
  • कार्य
    • देश के सर्वोच्च कानून के रूप में, संविधान निम्नलिखित कार्य करता है:
      • नागरिकों के अधिकारों का निर्धारण
      • सरकार की शक्ति और उसके कामकाज के तौर-तरीकों को निर्धारित करना

दक्षिण अफ्रीका में लोकतांत्रिक संविधान

रंगभेद के खिलाफ संघर्ष (Struggle Against Apartheid)

  • रंगभेद: रंगभेद एक दमनकारी व्यवस्था थी, जो दक्षिण अफ्रीका में यूरोपीय गोरे लोगों द्वारा नस्ली भेदभाव के आधार पर चलाई गई थी।
  • भेदभाव:
    • गोरे शासक अश्वेत (काले) लोगों को नीचा मानते थे।
    • अश्वेतों को वोट देने का अधिकार नहीं था।
  • पृथक्करण (Separation/Apartheid)
    • सार्वजनिक स्थानों जैसे रेलगाड़ी, बस, अस्पताल, स्कूल और गिरजाघरों में गोरों और अश्वेतों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएँ थीं।
    • अश्वेतों को गोरों की बस्तियों में रहने या संगठन बनाने का अधिकार नहीं था।
  • नेतृत्व
    • 1950 से, अश्वेत, रंगीन चमड़ी वाले और भारतीय मूल के लोगों ने अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस (ANC) के नेतृत्व में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष किया।
    • इस संघर्ष का नेतृत्व नेल्सन मंडेला ने किया।
    • 1964 में नेल्सन मंडेला को देशद्रोह के आरोप में आजीवन कारावास की सजा दी गई और उन्हें 27 वर्षों तक रोब्बेन द्वीप जेल में रखा गया।

एक नए संविधान की ओर

बदलाव

  • रंगभेद के खिलाफ बढ़ते संघर्ष के कारण गोरी सरकार को यह एहसास हुआ कि वे ज़ोर-जबरदस्ती से शासन नहीं कर सकते।
  • भेदभाव वाले कानूनों को वापस लिया गया, राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध हटाए गए और मीडिया पर पाबंदियाँ हटा ली गईं।
  • नेल्सन मंडेला को 28 साल बाद आज़ाद किया गया।

नया लोकतांत्रिक देश

  • 26 अप्रैल 1994 की मध्य रात्रि को दक्षिण अफ्रीका गणराज्य का नया झंडा लहराया और यह दुनिया का एक नया लोकतांत्रिक देश बन गया।

समझौता और संविधान निर्माण

  • ऐतिहासिक रूप से दुश्मन रहे दो समूहों (गोरों और अश्वेतों) ने शांतिपूर्ण ढंग से लोकतांत्रिक व्यवस्था अपनाने पर सहमति व्यक्त की।
  • अश्वेत नेताओं ने पुराने ज़ुल्मों को भूलकर गोरों को माफ करने और सभी नस्लों तथा स्त्री-पुरुष की समानता पर आधारित नए दक्षिण अफ्रीका के निर्माण का आग्रह किया।
  • दो वर्षों की चर्चा के बाद दुनिया का सबसे बेहतरीन संविधान बना, जिसने नागरिकों को सबसे व्यापक अधिकार दिए।

इंद्रधनुषी देश (Rainbow Nation)

  • आज का दक्षिण अफ्रीका सभी नस्लों, स्त्री और पुरुष को समान मानता है।
  • इसे ‘इंद्रधनुषी देश’ कहा जाता है क्योंकि यह सभी रंग के लोगों को समान रूप से साझा करने का घोषणापत्र है।

हमें संविधान की ज़रूरत क्यों है?

संविधान उन लिखित नियमों का समूह है, जिसकी ज़रूरत हर देश और संगठन को होती है। इसके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:

संविधान के प्रमुख कार्य व्याख्या
1. भरोसा और सहयोग यह विभिन्न तरह के लोगों के बीच ज़रूरी भरोसा और सहयोग विकसित करता है।
2. सरकार के गठन का स्पष्टीकरण यह स्पष्ट करता है कि सरकार का गठन कैसे होगा और किसे फ़ैसले लेने का अधिकार होगा।
3. सरकार के अधिकारों की सीमा यह सरकार के अधिकारों की सीमा तय करता है और नागरिकों के अधिकारों को परिभाषित करता है।
4. समाज की आकांक्षाएँ यह अच्छे समाज के गठन के लिए लोगों की आकांक्षाओं को व्यक्त करता है।
 

भारतीय संविधान का निर्माण

कठिन परिस्थितियाँ (Difficult Circumstances)

  • विभाजन की विभीषिका
    • भारत का संविधान देश के विभाजन (धर्म के आधार पर) की भारी हिंसा और बर्बादी के बीच बना, जिसमें लाखों लोग मारे गए थे।
  • देशी रियासतें
    • अंग्रेज़ों ने देसी रियासतों के शासकों को भारत या पाकिस्तान में विलय करने या स्वतंत्र रहने की आज़ादी दी थी।
    • इन रियासतों का विलय एक मुश्किल और अनिश्चय भरा काम था।
  • नागरिकता का बदलाव
    • लोग गुलाम की हैसियत से निकलकर नागरिक की हैसियत पाने जा रहे थे।

संविधान निर्माण का रास्ता

  • राष्ट्रीय सहमति
    • आज़ादी की लड़ाई के दौरान लोकतंत्र समेत अधिकांश बुनियादी बातों पर राष्ट्रीय सहमति बन चुकी थी।
  • आरंभिक प्रयास
    • 1928: मोतीलाल नेहरू और कांग्रेस के आठ अन्य नेताओं ने भारत का एक संविधान लिखा था।
    • 1931: कराची अधिवेशन में प्रस्ताव पारित हुआ, जिसमें सार्वभौम वयस्क मताधिकार, स्वतंत्रता, समानता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की बात कही गई थी।
  • संस्थागत अनुभव
    • 1937 के बाद हुए प्रादेशिक असेंबलियों के चुनाव और उसमें बनी सरकारों में काम करने का अनुभव भारतीय नेताओं के लिए लाभदायक सिद्ध हुआ।
    • 1935 के भारत सरकार कानून के कई संस्थागत स्वरूपों को अपनाया गया।
  • विदेशी प्रेरणाएँ
    • भारतीय नेताओं ने फ्रांसीसी क्रांति के आदर्शों, ब्रिटेन के संसदीय लोकतंत्र, अमेरिका के अधिकारों की सूची और रूस की समाजवादी क्रांति से प्रेरणा ली।
    • सामाजिक और आर्थिक समता पर आधारित व्यवस्था बनाने की कल्पना की गई।

संविधान सभा (Constituent Assembly)

  • गठन
    • संविधान सभा चुने गए जनप्रतिनिधियों की वह सभा थी, जो संविधान लिखने का काम करती थी।
    • इसके लिए चुनाव जुलाई 1946 में हुए थे।
    • इसकी पहली बैठक दिसंबर 1946 में हुई थी।
  • सदस्य
    • भारतीय संविधान लिखने वाली सभा में 299 सदस्य थे।
    • इस सभा में सभी भौगोलिक क्षेत्रों और सामाजिक समूहों का उचित प्रतिनिधित्व था।
  • कार्यप्रणाली
    • संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को अपना काम पूरा किया।
    • संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, जिसकी याद में हर साल गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।
    • संविधान बनाने में 3 वर्ष के भीतर कुल 114 दिनों की गंभीर चर्चा हुई, और 2000 से ज़्यादा संशोधनों पर विचार हुआ।
    • डॉ. बी.आर. अंबेडकर प्रारूप (Drafting) कमेटी के अध्यक्ष थे।
    • डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे।

भारतीय संविधान के बुनियादी मूल्य (Guiding Values)

संविधान की प्रस्तावना (Preamble) संविधान के दर्शन को व्यक्त करती है। संविधान निर्माताओं के विचार निम्नलिखित मूल्यों पर आधारित थे:

महात्मा गांधी का सपना

  • एक ऐसा भारत, जिसे सबसे गरीब व्यक्ति भी अपना माने।
  • जिसमें ऊंच-नीच का वर्ग न हो, और छुआछूत, शराब और नशीली चीज़ों के लिए कोई जगह न हो।
  • औरतों को पुरुषों जैसे अधिकार दिए जाने की बात।

डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचार

  • भेदभाव और गैर-बराबरी मुक्त भारत के पक्षधर।
  • चिंता: राजनीति में ‘एक व्यक्ति-एक वोट’ का सिद्धांत होगा, लेकिन सामाजिक और आर्थिक असमानता राजनीतिक लोकतंत्र को संकट में डालेगी।

जवाहरलाल नेहरू का भाषण (“नियति से साक्षात्कार”)

  • 15 अगस्त 1947 को मध्य रात्रि में कहा: भारत की सेवा का अर्थ है दरिद्रता (गरीबी), अज्ञान, बीमारियों और अवसर की असमानता का अंत करना।
  • सामाजिक और आर्थिक समानता, स्वतंत्रता, और सभी नागरिकों के सम्मान पर आधारित राष्ट्र निर्माण।

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