पाठ – 4
संस्थाओं का कामकाज
In this post we have given the detailed notes of class 9 SST (Polity) Chapter 4 संस्थाओं का कामकाज (Working of Institutions) in Hindi. These notes are useful for the students who are going to appear in class 9 exams.
इस पोस्ट में कक्षा 9 के सामाजिक विज्ञान (इतिहास) के पाठ 4 संस्थाओं का कामकाज (Working of Institutions) के नोट्स दिये गए है। यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है जो इस वर्ष कक्षा 9 में है एवं सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ रहे है।
| Board | CBSE Board, UP Board, JAC Board, Bihar Board, HBSE Board, UBSE Board, PSEB Board, RBSE Board, CGBSE Board, MPBSE Board |
| Textbook | NCERT |
| Class | Class 9 |
| Subject | SST (Polity) |
| Chapter no. | Chapter 4 |
| Chapter Name | संस्थाओं का कामकाज (Working of Institutions) |
| Category | Class 9 SST (Polity) Notes in Hindi |
| Medium | Hindi |
परिचय: प्रमुख नीतिगत फ़ैसले
लोकतंत्र का अर्थ केवल शासकों का चुनाव करना नहीं है, बल्कि उन्हें कुछ कायदे-कानूनों के भीतर संस्थाओं के साथ और उनके भीतर रहकर काम करना होता है। इस अध्याय में हम तीन प्रमुख संस्थाओं – विधायिका, कार्यपालिका, और न्यायपालिका – के कामकाज को समझेंगे।
एक प्रमुख सरकारी फ़ैसला: मंडल आयोग का उदाहरण
फ़ैसला
भारत सरकार ने 13 अगस्त 1990 को एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया था कि “केंद्रीय सरकार की नौकरियों में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (एस.ई.बी.सी.) के लिए 27% आरक्षण” होगा।
पृष्ठभूमि
- 1979: भारत सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग की पहचान के लिए दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग (मंडल आयोग) गठित किया, जिसके अध्यक्ष बी.पी. मंडल थे।
- 1980: मंडल आयोग ने अपनी सिफ़ारिशें दीं, जिसमें 27% आरक्षण का सुझाव दिया गया था।
- 1989: लोकसभा चुनाव में जनता दल ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में मंडल आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करने का वादा किया।
- 1990: जनता दल की सरकार ने इस सिफ़ारिश को लागू करने का निर्णय लिया और 13 अगस्त 1990 को सरकारी आदेश (कार्यालय ज्ञापन) जारी किया गया।
विवाद और सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप
- इस आदेश के कारण देश भर में विवाद और विरोध हुआ।
- कई संगठनों और लोगों ने आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में कई मुकदमे दायर किए।
- 1992: सर्वोच्च न्यायालय ने “इंदिरा साहनी एवं अन्य बनाम भारत सरकार” मुक़दमे में इस आदेश को वैध (वैधानिक) ठहराया, लेकिन कुछ संशोधन करने को कहा (जैसे ‘क्रीमी लेयर’ को आरक्षण के दायरे से बाहर करना)।
प्रमुख फ़ैसला लेने वाले
सरकारी आदेश (कार्यालय ज्ञापन) जारी होने से लेकर उसके लागू होने तक की प्रक्रिया में कई संस्थाओं ने भूमिका निभाई:
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संस्था |
भूमिका (Role) |
|---|---|
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राष्ट्रपति (President) |
देश का औपचारिक (Formal) मुखिया और सर्वोच्च अधिकारी। सरकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके इसे अंतिम रूप दिया। |
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प्रधानमंत्री (Prime Minister) |
देश का वास्तविक (Real) शासक और सरकार का मुखिया। यह फ़ैसला प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट ने किया। |
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संसद (Parliament) |
कानून बनाने वाली संस्था। प्रधानमंत्री को संसद में बहुमत का समर्थन प्राप्त था, इसलिए वह यह फ़ैसला ले पाए। |
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सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) |
फ़ैसले से उत्पन्न विवाद को सुलझाने वाली संस्था। उसने इस सरकारी आदेश की वैधता की जाँच की। |
संस्थाओं की आवश्यकता और व्यवस्था
संस्थाओं की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि वे नागरिकों और सरकार के बीच नियम-कानूनों को स्पष्ट करती हैं। संस्थाओं का काम करने का तरीका:
- नियम और कायदे: ये नियम, कानून और प्रक्रियाएँ तय करती हैं।
- बैठकें और समितियाँ: ये कई बैठकें करती हैं, समितियाँ बनाती हैं ताकि सही फ़ैसला लिया जा सके।
- दंड का प्रावधान: ये काम-काज में देरी करती हैं, लेकिन अच्छे फ़ैसले के लिए ज़रूरी हैं।
लोकतंत्र की तीन प्रमुख संस्थाएँ
विधायिका (Legislature) – संसद
परिभाषा
जनप्रतिनिधियों की सर्वोच्च संस्था जिसके पास देश के लिए कानून बनाने का अधिकार है, संसद कहलाती है।
कार्य
- कानून बनाना: संसद पूरे देश या देश के किसी हिस्से के लिए कानून बनाती है।
- सरकार पर नियंत्रण: यह सरकार चलाने वालों (कार्यपालिका) को नियंत्रित करती है।
- वित्तीय नियंत्रण: सरकार के हर सार्वजनिक खर्च को संसद की मंज़ूरी की ज़रूरत होती है।
- बहस और चर्चा: संसद देश की नीतियों पर विचार-विमर्श करने का सर्वोच्च मंच है।
संसद के दो सदन (Houses of Parliament)
भारतीय संसद के दो सदन हैं:
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सदन का नाम |
अन्य नाम |
सदस्यों का चुनाव |
मुख्य शक्तियाँ |
|---|---|---|---|
|
लोकसभा |
निचला सदन (House of the People) |
प्रत्यक्ष चुनाव (जनता द्वारा) |
धन विधेयक पेश करने और बहुमत का समर्थन खोने पर सरकार को हटाने की शक्ति। सरकार पर ज़्यादा नियंत्रण। |
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राज्यसभा |
ऊपरी सदन (Council of States) |
अप्रत्यक्ष चुनाव (राज्य विधानसभाओं द्वारा) |
राज्य से संबंधित विषयों पर कानून बनाने की पहल, केंद्र-राज्य संबंधों को प्रभावित करने की शक्ति। |
कार्यपालिका (Executive) – सरकार चलाने वाले
परिभाषा
व्यक्तियों का वह समूह जो कानूनों को लागू करने और प्रशासन चलाने के लिए ज़िम्मेदार है, कार्यपालिका कहलाता है।
प्रकार
- राजनीतिक कार्यपालिका: प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद, जो चुनाव से आते हैं और हर पाँच साल में बदलते हैं। ये जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं।
- स्थायी कार्यपालिका (सिविल सेवा): लंबे समय के लिए नियुक्त अधिकारी (IAS, IPS आदि)। ये राजनीतिक बदलावों के बावजूद अपने पद पर बने रहते हैं।
प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद
- प्रधानमंत्री: लोकसभा में बहुमत दल का नेता। राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है।
- मंत्रिपरिषद: प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त मंत्रियों का समूह। यह सरकार के हर स्तर के फ़ैसलों को नियंत्रित करता है।
न्यायपालिका (Judiciary) – विवादों को सुलझाने वाली
परिभाषा
देश की सभी अदालतों को एक साथ न्यायपालिका कहते हैं।
स्वतंत्रता
भारतीय न्यायपालिका स्वतंत्र है, जिसका अर्थ है कि वह विधायिका और कार्यपालिका के नियंत्रण में नहीं है।
शक्तियाँ
- विवादों को सुलझाना: नागरिकों के बीच, नागरिक और सरकार के बीच, दो या दो से अधिक राज्य सरकारों के बीच, या केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विवादों को सुलझाती है।
- न्यायिक समीक्षा (Judicial Review): संसद द्वारा पारित किसी भी कानून या कार्यपालिका द्वारा लिए गए किसी भी फ़ैसले को रद्द कर सकती है, यदि वह संविधान का उल्लंघन करता हो।
- संविधान का संरक्षक: यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करती है और संविधान की व्याख्या करती है।
संरचना
- भारत में एक एकीकृत न्यायपालिका है, जिसके शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) है। इसके नीचे उच्च न्यायालय और फिर ज़िला न्यायालय हैं।
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